भरत तिवारी का एनकाउंटर CM सम्राट पर पड़ रहा भारी

एनकाउंटर मॉडल पर बीजेपी में ही दो फाड़

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पटना, 20 जून्‌ 2026 । बिहार में चर्चित अपराधी भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इस कार्रवाई को लेकर अब केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आने लगी हैं। एनकाउंटर को लेकर उठे सवालों ने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary और सरकार की कानून-व्यवस्था नीति को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

विपक्ष के साथ BJP के अंदर से भी सवाल

भोजपुर एनकाउंटर ने सम्राट सरकार पर सवाल तो खड़े कर डाले हैं। बीजेपी भी इस मसले पर बंटती हुई दिख रही है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यह दुर्भाग्य है। हालांकि भरत तिवारी की भाषा भी ठीक नहीं थी। पर उसने जब सरेंडर कर दिया, हथियार फेंक दिया तो पुलिस को एनकाउंटर नहीं करनी चाहिए था। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भोजपुर एनकाउंटर पर कहा कि यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है । पुलिस की लापरवाही साफ झलक रही है और जिस मामले का आसानी से समाधान किया जा सकता था, उसे इस तरह अंजाम देना उचित नहीं था। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभालने में सूझबूझ नहीं दिखाई। सरकार इस पूरे मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है । किसी भी सभ्य समाज में रक्षक भक्षक नहीं बन सकता ।

भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद विपक्षी दल लगातार इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के कुछ नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है और इसे अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश बताया है। दूसरी ओर, पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं और सहयोगी दलों की ओर से एनकाउंटर मॉडल पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक असहजता बढ़ती दिखाई दे रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार की सख्त नीति और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन का मुद्दा अब प्रमुख बहस बन गया है। एनकाउंटर की वैधता, पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार कानून के शासन की बजाय एनकाउंटर को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है। इसी बीच भाजपा के भीतर अलग-अलग सुर सामने आने से यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल कर गया है।

आने वाले दिनों में इस मामले पर सरकार, विपक्ष और भाजपा के विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रियाएं बिहार की राजनीति को और प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक विमर्श का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

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