यमुना डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण पर बड़ा एक्शन
20 जून को चलेगा बुलडोजर, अफसरों की जवाबदेही भी तय होगी
नोएडा, 18 जून् 2026 । नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना के डूब क्षेत्र में बने अवैध फार्म हाउसों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अधिकारियों ने 20 जून को बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाने की तैयारी तेज कर दी है। इस कार्रवाई का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों को हटाना और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
सीईओ कृष्णा करुणेश ने निर्देशों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है। सीईओ के इस आदेश को लेकर लोग तरह-तरह की बात कर रहे है। लोग यमुना-हरनंदी के डूब क्षेत्र में चल रही अवैध बनावट और नोएडा प्राधिकरण की सख्त कार्रवाई पर गर्मा-गर्म बहस कर रहे हैं।
लापरवाही बरतने पर अफसर हटाए जाएंगे: सीईओ
सीईओ ने अपने विभाग के वर्क सर्किल अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि 20 जून तक यमुना-हरनंदी के डूब क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाए नहीं गए तो उन्हें उनके-अपने क्षेत्रों से हटाया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि यह इलाका प्राधिकरण का नोटिफाइड क्षेत्र है और यहां किसी भी तरह का स्थायी निर्माण वर्जित है, फिर भी वर्षों से अवैध फार्महाउस, पक्के मकान, रिसॉर्ट जैसे ढांचे और यहां तक कि स्विमिंग पूल भी बनाए जा चुके हैं। सीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माणाधीन तथा पहले से मौजूद सभी अवैध पक्के ढांचों की सूची बनाकर उन्हें तोड़ा जाए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यमुना के फ्लडप्लेन क्षेत्र में कई स्थानों पर नियमों के विपरीत फार्म हाउस और अन्य स्थायी ढांचे खड़े किए गए हैं। इन निर्माणों को लेकर पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर अब बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण न केवल पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करते हैं, बल्कि बाढ़ के दौरान जल प्रवाह में भी बाधा उत्पन्न कर सकते हैं। इसी कारण संबंधित विभागों को संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात रहेगा।
इस अभियान की खास बात यह है कि केवल अवैध निर्माणकर्ताओं पर ही नहीं, बल्कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी की उदासीनता, मिलीभगत या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से यमुना के डूब क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर चिंता जताते रहे हैं। उनका मानना है कि फ्लडप्लेन को संरक्षित रखना नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद आवश्यक है। ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
20 जून को प्रस्तावित ध्वस्तीकरण अभियान पर स्थानीय लोगों, पर्यावरणविदों और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह अभियान क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।