हर मौसम में शान से लहराएगा तिरंगा: फैब्रिक की वैज्ञानिक जांच कराएगी सरकार, बढ़ेगी मजबूती और टिकाऊपन

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नई दिल्ली, 17 जून्‌ 2026 । देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। कुछ दिन पहले 100 किमी/घंटे से भी अधिक रफ्तार से आए तूफान में कई जगहों पर लगे तिरंगे झंडे फट गए थे। तेज हवाओं, आंधी-तूफान और विभिन्न मौसमीय परिस्थितियों में तिरंगे को अधिक समय तक सुरक्षित और सम्मानजनक स्थिति में बनाए रखने के लिए इसके फैब्रिक की वैज्ञानिक स्टडी कराई जाएगी। इस अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कपड़ा किस प्रकार अधिक मजबूत, टिकाऊ और मौसम प्रतिरोधी बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञ संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों की मदद से तिरंगे के कपड़े की गुणवत्ता, उसकी मजबूती, रंगों की स्थिरता और विभिन्न मौसमीय परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन का परीक्षण किया जाएगा। अध्ययन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि लगातार धूप, बारिश, नमी और तेज हवाओं का कपड़े पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा उसे और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए कौन-से सुधार किए जा सकते हैं।

सरकार का मानना है कि देशभर में सरकारी भवनों, सार्वजनिक स्थलों और ऊंचे ध्वज स्तंभों पर लगाए जाने वाले तिरंगों को अक्सर मौसम की मार झेलनी पड़ती है। कई बार तेज हवाओं और तूफानी परिस्थितियों के कारण ध्वज को नुकसान पहुंचता है, जिससे उसे बार-बार बदलना पड़ता है। वैज्ञानिक अध्ययन के बाद बेहतर गुणवत्ता वाले फैब्रिक के उपयोग से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

इस पहल का एक उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को बनाए रखना भी है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर भविष्य में तिरंगे के निर्माण संबंधी मानकों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे उसकी आयु बढ़े और वह लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बना रहे।

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