हरियाणा पुलिस में बड़ा बदलाव: 45 साल से अधिक उम्र के जवान अब नहीं करेंगे नाकों पर ड्यूटी, ADGP के नए आदेश से बदलेगी व्यवस्था
हरियाणा , 19 मई 2026 । हरियाणा पुलिस विभाग में ड्यूटी सिस्टम को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार अब 45 वर्ष से अधिक उम्र के पुलिसकर्मियों को सड़क नाकों, चेकिंग पॉइंट्स और भारी ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में लंबी ड्यूटी से राहत दी जाएगी। विभाग का मानना है कि लगातार घंटों तक खड़े रहकर नाकाबंदी करना, वाहनों की जांच करना और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी रखना शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, जिसका असर वरिष्ठ पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
ADGP द्वारा जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि भीषण गर्मी के दौरान लंबे समय तक नाकाबंदी करने से पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी नाके पर लगातार तीन घंटे से अधिक ड्यूटी न लगाई जाए। यदि कोई विशेष अलर्ट या घटना नहीं हो तो सुबह 11 से शाम 4 बजे तक नाके हटाए जा सकते हैं।
नई व्यवस्था के तहत युवा और शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय जवानों को नाकों पर प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि 45 वर्ष से ऊपर के कर्मचारियों को कंट्रोल रूम, रिकॉर्ड शाखा, जांच कार्य, कार्यालय संचालन, साइबर मॉनिटरिंग और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लगाया जा सकता है। पुलिस विभाग का उद्देश्य केवल कार्यक्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को भी बेहतर बनाए रखना है।
पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आ रही शिकायतों में यह बात सामने आई थी कि उम्रदराज पुलिसकर्मियों को घंटों धूप, प्रदूषण, बारिश और ट्रैफिक के बीच ड्यूटी करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर, शुगर, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही थीं। कई जिलों से ऐसे मामले भी सामने आए थे जहां ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी बेहोश हो गए या स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ADGP कार्यालय से जारी दिशा-निर्देशों में पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि ड्यूटी लगाते समय कर्मचारियों की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और कार्य क्षमता का ध्यान रखा जाए। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वरिष्ठ कर्मचारियों के अनुभव का बेहतर उपयोग जांच और प्रशासनिक कार्यों में किया जाए।
इस फैसले को पुलिस विभाग में एक मानवीय और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। कई पुलिस कर्मचारियों और संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे जवानों का मनोबल बढ़ेगा और कार्यस्थल पर बेहतर संतुलन बनेगा। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।