लुधियाना में दो कॉल सेंटरों पर पुलिस की बड़ी रेड, 100 से ज्यादा युवक-युवतियां हिरासत में
लुधियाना , 14 मई 2026 । लुधियाना में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध कॉल सेंटरों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 100 से ज्यादा युवक-युवतियों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस अब कॉल सेंटरों के संचालन, वित्तीय लेनदेन और गतिविधियों की जांच में जुट गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, ये फर्जी कॉल सेंटर फिरोजपुर रोड स्थित संधू टावर और सिल्वर आर्क मॉल के पास एक अन्य बिल्डिंग में धड़ल्ले से चल रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि यहां से बड़े स्तर पर इंटरनेशनल स्कैम (International Scam) चलाया जा रहा है। गिरफ्तार किए गए आरोपी पंजाब के अलावा अन्य राज्यों से लुधियाना आकर यहां ऊंची तनख्वाह के लालच में नौकरी कर रहे थे। इनका मुख्य काम विदेशों में बैठे लोगों को फोन करके डराना-धमकाना या झांसे में लेकर उनके बैंक खातों पर डाका डालना था।
जानकारी के अनुसार पुलिस को इन कॉल सेंटरों में कथित रूप से संदिग्ध गतिविधियां चलने की सूचना मिली थी। इसके बाद विशेष टीमों ने देर रात संयुक्त अभियान चलाकर दोनों स्थानों पर रेड की। कार्रवाई के दौरान कई कंप्यूटर, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इन कॉल सेंटरों के जरिए लोगों से ऑनलाइन ठगी, फर्जी तकनीकी सहायता, विदेशी नागरिकों को कॉल या अन्य साइबर अपराध तो नहीं किए जा रहे थे। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है और उनके दस्तावेजों की भी जांच हो रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है। साइबर एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीमों को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डेटा का विश्लेषण किया जा सके।
घटना के बाद स्थानीय इलाके में चर्चा का माहौल है। बड़ी संख्या में युवाओं के हिरासत में लिए जाने से कई परिवार भी चिंतित नजर आए। वहीं पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे नेटवर्क आम लोगों को बैंकिंग, टेक्निकल सपोर्ट या निवेश के नाम पर निशाना बनाते हैं। इसलिए इस तरह की कार्रवाई साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए अहम मानी जा रही है।