सहारनपुर में मूर्ति विवाद के बाद तनाव, मायावती ने सरकार पर साधा निशाना, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग तेज
सहारनपुर , 11 मई 2026 । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मूर्ति विवाद को लेकर भड़की हिंसा ने इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। विवाद के बाद हुई झड़पों और तोड़फोड़ की घटनाओं ने स्थानीय लोगों में डर और चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।
बसपा अध्यक्ष मायावती ने पुलिस और प्रशासन से मामले में तत्काल तथा निष्पक्ष कारर्वाई करने की मांग करते हुये कहा कि प्रशासन को हालात पर पूरी तरह नियंत्रण रखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। बसपा सुप्रीमो ने दोनों पक्षों से भी संयम बरतने और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मामले को ताकत के बजाय कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में तनाव न बढ़े और शांति कायम रह सके।
इस पूरे मामले पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख Mayawati ने राज्य सरकार को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। मायावती ने कहा कि इस घटना में दलित समाज को निशाना बनाया गया और प्रशासन की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रही है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, चाहे वे किसी भी समुदाय या संगठन से जुड़े हों।
मायावती ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान के जरिए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने दलित समाज से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि पार्टी इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी। वहीं विपक्षी दलों ने भी घटना को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन का कहना है कि इलाके में स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी अफवाह को फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने हिंसा में शामिल संदिग्ध लोगों की पहचान शुरू कर दी है और कई स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। इंटरनेट मीडिया पर भी प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है ताकि भड़काऊ सामग्री को रोका जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटनाएं राजनीतिक और सामाजिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है, खासकर तब जब विभिन्न दल इसे सामाजिक न्याय और कानून-व्यवस्था के मुद्दे से जोड़कर देख रहे हैं।