35 हजार में देश की सुरक्षा से समझौता! जासूसी रैकेट का भंडाफोड़, आरोपियों के चौंकाने वाले खुलासे
पंजाब , 01 मई 2026 । पंजाब पुलिस ने आई.एस.आई. समर्थित दो अलग-अलग जासूसी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर कुछ लोगों ने महज 35 हजार रुपये के बदले संवेदनशील जानकारी लीक कर दी। जांच एजेंसियों द्वारा पकड़े गए संदिग्ध जासूसों ने पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिससे सुरक्षा तंत्र में हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार काऊंटर इंटैलीजैंस जालंधर ने एक संचालक को गिरफ्तार कर पहले मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। आरोपी के कब्जे से 4जी कनैक्टिविटी वाला एक चीनी सी.सी.टी.वी. कैमरा तथा सोलर प्लेट बरामद की गई है। वहीं कपूरथला पुलिस ने एक केंद्रीय एजैंसी के साथ संयुक्त ऑपरेशन में दो व्यक्तियों को विदेशी हैंडलरों से जुड़े चार मोबाइल फोन, एक सिम आधारित सी.सी.टी.वी. कैमरा और एक वाई-फाई सैट सहित गिरफ्तार कर दूसरे मॉड्यूल का खुलासा किया है। काऊंटर इंटैलीजैंस ऑपरेशन में गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुखविंदर सिंह उर्फ सुख्खा निवासी गांव सहांके, फिरोजपुर के रूप में हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्हें छोटी-छोटी रकम के बदले संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के लिए तैयार किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि उन्हें सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए संपर्क किया गया था, जहां धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसाया गया।
मोबाइल, सिम कार्ड, सोलर प्लेट और अन्य सामान बरामद
ए.आई.जी. काउंटर इंटेलिजेंस जालंधर सिमरतपाल सिंह ढींडसा ने जालंधर कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए बताया कि सुखविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने सोलर प्लेट और एक सिम कार्ड सहित सीसीटीवी कैमरा बरामद किया है। कपूरथला मॉड्यूल के बारे में जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कपूरथला गौरव तूरा ने बताया कि आर्मी कैंट के पास संदिग्ध निगरानी संबंधी सूचना के आधार पर मॉडल टाउन, कपूरथला स्थित एक दुकान पर छापा मारा गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पास के खंभे पर सिम आधारित कैमरा लगाने हेतु दुकान किराये पर ली हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्हें छोटी-छोटी रकम के बदले संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के लिए तैयार किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि उन्हें सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए संपर्क किया गया था, जहां धीरे-धीरे उन्हें अपने जाल में फंसाया गया।
सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क के बड़े कनेक्शन और संभावित विदेशी लिंक की जांच कर रही हैं। कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि साइबर और मानव आधारित जासूसी के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों और आम नागरिकों दोनों को जागरूक रहने की जरूरत है, ताकि इस तरह के लालच या दबाव में आकर कोई भी देशहित के खिलाफ कदम न उठाए।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने साफ किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।