बर्खास्त सिपाही का ‘स्पेशल टीम’ गैंग पकड़ा गया, रोज 1500 रुपए देकर कराता था ठगी

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बिहार , 23 अप्रैल 2026 । बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक चौंकाने वाले मामले में बर्खास्त किए गए एक सिपाही ने खुद की “स्पेशल टीम” बनाकर ठगी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया था। पुलिस कार्रवाई में इस गिरोह के पांच जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी सिपाही की भूमिका की भी गहराई से जांच की जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि मामले का खुलासा तब हुआ जब मुफ्फसिल थाने में सबदर नामक व्यक्ति ने अपने अपहरण की एक झूठी शिकायत दर्ज कराई। इसी बीच सैफुद्दीन नामक एक अन्य व्यक्ति ने मारपीट का आवेदन दिया। जब प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सह थानाध्यक्ष कुमारी प्रियंका ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो कड़ियां जुड़ती गईं। सबसे पहले पुलिस ने शिकायतकर्ता सबदर को ही हिरासत में लिया, जिसकी निशानदेही पर आरिफ और फिर गिरोह के मास्टरमाइंड एलबी राम उर्फ लालबाबू राम की गिरफ्तारी हुई।

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सिपाही लोगों को रोजाना ₹1500 रुपए देकर अपने गैंग में शामिल करता था। इसके बाद उन्हें अलग-अलग इलाकों में भेजकर ठगी की वारदातों को अंजाम दिलवाता था। यह गैंग फर्जी पहचान, फोन कॉल और अन्य तरीकों से लोगों को झांसे में लेकर पैसे ऐंठता था।

पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था। गैंग के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में बंटे हुए थे—कोई कॉल करता था, कोई बैंक डिटेल्स जुटाता था और कोई पैसे ट्रांसफर करवाने का काम करता था। इस तरह वे रोजाना कई लोगों को निशाना बनाते थे।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। इन सबूतों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और कितनी रकम ठगी गई है।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। साथ ही, साइबर क्राइम यूनिट को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि डिजिटल ट्रांजेक्शन का पूरा ट्रेल खंगाला जा सके।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अनजान कॉल्स, लुभावने ऑफर्स और संदिग्ध लिंक से सतर्क रहें। किसी भी तरह की ठगी की आशंका होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

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