इलाज में लापरवाही साबित—अस्पताल पर 58 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश, न्यायिक सख्ती का बड़ा संदेश

0

नई दिल्ली, 27  मार्च 2026 । चिकित्सा लापरवाही के एक अहम मामले में उपभोक्ता न्याय प्रणाली ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अस्पताल को पीड़ित परिवार को 58 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस फैसले को मरीजों के अधिकारों की रक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मरीजों के अधिकारों के लिए एक अहम फैसले में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फोर्टिस, फ़्लाइट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल को घोर मेडिकल लापरवाही का दोषी ठहराया और उन्हें एक मृत मरीज के बेटे को 58 लाख से ज्यादा का भुगतान करने का आदेश दिया। यह मामला 2014 में वसंत विहार, कटवरिया सराय गांव के निवासी सचिन की अपने पिता, सुरेश कुमार की मृत्यु के बाद दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुआ था।

पूरा मामला 

सड़क दुर्घटना में लगी चोटों के इलाज के लिए भर्ती होने के बाद अस्पताल में लंबे समय तक रहने के दौरान कुमार को ग्रेड- IV डेक्यूबिटस अल्सर (बेडसोर) हो गए। एक प्लास्टिक सर्जन ने VAC (वैक्यूम असिस्टेड क्लोजर) ड्रेसिंग का इस्तेमाल करने की सलाह दी, जो ऐसे गंभीर घावों के लिए एक मानक इलाज है। बावजूद इसके अस्पताल इस प्रक्रिया को करने में नाकाम रहा। वसंत कुंज के प्रतिवादी अस्पताल ने अपने बचाव में दावा किया कि VAC ड्रेसिंग के उपकरण अस्पताल में उपलब्ध नहीं थे और मरीजके तीमारदारों ने न तो इसके लिए सहमति दी थी और न ही खुद ये उपकरण लाकर दिए थे।

मामले के अनुसार, पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि इलाज के दौरान अस्पताल की ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण मरीज की हालत बिगड़ गई और अंततः उसकी जान चली गई। जांच के दौरान सामने आया कि समय पर सही उपचार नहीं दिया गया और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

सुनवाई के दौरान संबंधित प्राधिकरण ने मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञों की राय और अन्य साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया। इसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि अस्पताल की लापरवाही सीधे तौर पर मरीज की मौत का कारण बनी। इसी के चलते अस्पताल को भारी मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के फैसले स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क रहने और मरीजों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाने का संदेश देते हैं। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सहायक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी एक नजीर स्थापित करता है।

इस मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और सख्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी इलाज मिल सके।

अंततः, यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है और कानून के तहत दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

Leave A Reply

Your email address will not be published.