पटना,04 नवंबर 2026 | बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की पार्टी में सांगठनिक भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में पार्टी के पोस्टरों से उनका नाम और तस्वीर गायब रहने, अनंत सिंह के निष्कासन और विधान पार्षद नीरज कुमार के बयानों ने इन चर्चाओं को और हवा दी है।
राजनीतिक विश्लेषणों में इसे ललन सिंह और JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा के बीच संभावित शक्ति संतुलन की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने ललन सिंह को सम्मानित वरिष्ठ नेता बताया है। अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिसमें उन्हें संगठन से जानबूझकर किनारे करने या कमजोर करने की रणनीति की पुष्टि हो।
फरक्का संधि के बहाने तोड़ा अनुशासन
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा (JDU Sanjay Jha) ने लखीसराय में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया था। पर इस आयोजन में मुंगेर के सांसद, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को दूर रखा। अब इसकी अंदरूनी वजह क्या है, यह तो जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ही जानें, लेकिन लखीसराय में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के समर्थकों ने इसे अच्छे नजरिए से नहीं लिया। उन्हें लगा कि जदयू के भीतर जो गुटबाजी चल रही है, उसी के परिप्रेक्ष्य में ललन सिंह को साइड लाइन करने की तैयारी चल रही है। हालांकि स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया के हवाले से पत्रकारों ने जब जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से सवाल पूछा तो संजय झा गोलमोल जवाब देते नजर आए। उन्होंने कहा कि वे केंद्रीय मंत्री हैं। उन्हें बहुत काम रहता है।
पार्टी पोस्टरों से ललन सिंह की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
JDU की ओर से विधान परिषद चुनाव में नीरज कुमार की जीत के बाद जारी किए गए पोस्टरों में ललन सिंह की तस्वीर नहीं दिखाई देने की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर सवाल उठे।
इसी दौरान नीरज कुमार ने चुनाव जीतने के बाद ललन सिंह से आशीर्वाद लेने को लेकर नाराजगी जताई थी। उनके बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सफाई देनी पड़ी। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने ललन सिंह के योगदान और वरिष्ठता का उल्लेख किया।
अनंत सिंह के निष्कासन से भी जुड़ा है मामला
JDU ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से JDU प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ जन सुराज के उम्मीदवार का समर्थन किया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच करीब 20 मिनट की मुलाकात हुई थी। इसके बाद पार्टी ने निष्कासन का फैसला लिया। इस घटनाक्रम से यह संकेत भी मिला कि ललन सिंह पार्टी के महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों में भूमिका निभा रहे थे।
संजय झा और ललन सिंह के बीच शक्ति संतुलन की चर्चा
JDU के भीतर संजय कुमार झा और ललन सिंह के समर्थकों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में पार्टी के भीतर दो खेमों की बात कही गई है। हालांकि, इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
NBT की एक रिपोर्ट में NDA के एक सूत्र के हवाले से दावा किया गया कि ललन सिंह पार्टी में अब भी प्रभावशाली हैं और उन्हें कमजोर मानना सही नहीं होगा। वहीं, संजय झा ने सार्वजनिक रूप से ललन सिंह को आदरणीय नेता बताया और कहा कि पार्टी में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं।
नीरज कुमार के बयान के बाद नेतृत्व ने किया हस्तक्षेप
नीरज कुमार और ललन सिंह के बीच कथित मतभेद भी पार्टी के लिए चर्चा का विषय बने। 2 नवंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, JDU के एक वरिष्ठ विधान पार्षद ने नीरज कुमार से फोन पर बातचीत की। इसके बाद नीरज ने सार्वजनिक रूप से इस विवाद पर बयान देना बंद कर दिया।
इससे पहले नीरज कुमार ने ललन सिंह के पार्टी में योगदान को स्वीकार किया था और उन्हें वरिष्ठ नेता बताया था। उनके रुख में आए बदलाव को पार्टी के भीतर विवाद शांत कराने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या ललन सिंह को कमजोर करने की कोशिश हो रही है?
ललन सिंह की सांगठनिक भूमिका, पार्टी पोस्टरों में उनकी गैरमौजूदगी और नेताओं के बीच बयानबाजी ने इस सवाल को जन्म दिया है कि क्या JDU में नेतृत्व का नया समीकरण बन रहा है। लेकिन केवल इन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पार्टी नेतृत्व उन्हें कमजोर करने की साजिश कर रहा है।
फिलहाल JDU नेतृत्व की ओर से ललन सिंह को संगठन से हटाने या उनकी भूमिका सीमित करने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्टी के कार्यक्रमों, संगठनात्मक नियुक्तियों और वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक भूमिका से ही इस राजनीतिक समीकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।