यूपी में पुलिसकर्मियों का तबादला नियम सख्त, 3 साल बाद बदलनी होगी तैनाती
लखनऊ , 29 अक्टूबर 2026 | उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। एक ही थाना या चौकी पर तीन साल से अधिक समय से तैनात पुलिसकर्मियों का ब्योरा पूरे प्रदेश से मांगा गया है। पुलिस मुख्यालय इस जानकारी के आधार पर लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात कर्मियों की सूची तैयार कर रहा है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के स्तर पर तबादलों को लेकर फैसला लिया जा सकता है।
इस कवायद को चुनाव से पहले पुलिस व्यवस्था की समीक्षा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तीन साल से अधिक समय से एक ही थाना या चौकी पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों का अनिवार्य रूप से तबादला होगा या नियमों के तहत कुछ मामलों में छूट भी दी जाएगी।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश के बाद डीजीपी मुख्यालय ने जिलों में तीन साल से तैनात पुलिसकर्मियों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। हटने वालों की फेहरिस्त में 20 से ज्यादा आईपीएस शामिल हैं। इसके अलावा सिपाही से लेकर एडिशनल एसपी रैंक के करीब दो हजार कर्मी भी हटाए जा सकते हैं। डीजीपी मुख्यालय की स्थापना शाखा ने सभी कमिश्नरेट और जिलों से इसका ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। इनका तबादला करने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी गठित की जा सकती है।
बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग ने एक ही जिले में तीन साल से तैनात, गृह जिले मे तैनात पुलिसकर्मियों को हटाने को कहा है। साथ ही जो पुलिसकर्मी पिछले चुनाव में जिन जिलों मे तैनात थे, यदि वर्तमान में भी उनकी तैनाती उसी जिले मे है तो उन्हें भी हटाया जाएगा। साथ ही उन कर्मियों को भी हटाया जाएगा जिनके विरुद्ध कोई विशिष्ट शिकायत की गई हो या किसी राजनीतिक दल के प्रति पूर्वाग्रह या पक्षपात के आरोप लगे हों।
अनुमान है कि इसकी जद में दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी आएंगे। हालांकि राज्य सरकार इससे पहले सरकारी मशीनरी को चुनाव के दृष्टिगत दुरस्त करने के लिए बड़े पैमाने पर तबादले करेगी। चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले आयोग के निर्देश की जद में आने वाले पुलिसकर्मियों को हटाकर दूसरी जगहों पर तैनात किया जाएगा।
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले क्यों अहम है यह कदम?
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी वजह से चुनाव से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की समीक्षा की जा रही है।
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत उन अधिकारियों की तैनाती बदलने पर जोर दिया जाता है, जो निर्धारित अवधि से एक ही जिले में कार्यरत हैं या अपने गृह जिले में तैनात हैं। उत्तर प्रदेश में चुनाव संबंधी कार्यों से जुड़े अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं।
किन पुलिसकर्मियों पर पड़ सकता है असर?
फिलहाल मांगे गए ब्योरे के आधार पर एक ही थाना या चौकी पर तीन साल से अधिक समय से तैनात पुलिसकर्मियों की पहचान की जाएगी। सूची तैयार होने के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से तबादलों पर निर्णय लिया जा सकता है।
इस प्रक्रिया में तैनाती की अवधि और चुनाव संबंधी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखा जाएगा। हालांकि, पुलिसकर्मियों की अंतिम सूची, तबादलों की संख्या और लागू होने वाली छूटों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए सभी कर्मियों का तबादला तय मानना जल्दबाजी होगी।
क्या बदल सकती है थानों और चौकियों की व्यवस्था?
यदि यह प्रक्रिया व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो प्रदेश के कई थानों और चौकियों में पुलिसकर्मियों की तैनाती बदल सकती है। इससे चुनाव से पहले पुलिस बल के पुनर्विन्यास और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारियों के नए बंटवारे की स्थिति बन सकती है।
अब पुलिस मुख्यालय की ओर से जुटाए जा रहे रिकॉर्ड और आगे जारी होने वाले निर्देशों पर नजर रहेगी। इन्हीं के आधार पर स्पष्ट होगा कि कितने पुलिसकर्मियों का तबादला होगा और नई तैनाती की प्रक्रिया कब शुरू होगी।