हल्द्वानी, 29 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड के लोगों को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में हल्द्वानी की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी ने वीडियो जारी कर अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अखिलेश यादव को थोड़ा छल लग गया है और उन्हें समझाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उत्तराखंड के लोगों से माफी नहीं मांगी जाती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
ज्योति अधिकारी ने अखिलेश यादव को उत्तराखंड का ‘जवाई’ यानी दामाद बताते हुए कहा कि उन्हें समझाकर उत्तराखंड के लोगों से माफी मंगवाई जाएगी। उनके वीडियो में व्यंग्य के साथ उत्तराखंड के सम्मान और पहचान का मुद्दा उठाया गया।
सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर ज्योति अधिकारी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर वीडियो बनाती रहती हैं। इस बार उन्होंने कुमाऊंनी और हिंदी में वीडियो जारी कर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश को उत्तराखंड का ‘जंवाई’ यानी दामाद बताया। उन्होंने कहा कि हम अपने जंवाई को समझाकर ससुराल वालों से माफी मंगवा लेंगे। दरसल, अखिलेश यादव ने पिछले दिनों कहा था कि यूपी में सबसे ज्यादा घुसपैठिए उत्तराखंड के हैं।
अखिलेश यादव के बयान के बाद उत्तराखंड में लगातार इसका विरोध हो रहा है। ज्योति अधिकारी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अखिलेश को थोड़ा छल लग गया है। वे एक-दो दिन में ठीक हो जाएंगे, लेकिन जब तक माफी नहीं मांगते विरोध जारी रहेगा।
क्या है उत्तराखंडी घुसपैठिया विवाद?
विवाद की शुरुआत 24 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव की टिप्पणी से हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों को लेकर सवाल उठाते हुए उत्तराखंड के लोगों का जिक्र किया। इसके बाद उनकी टिप्पणी को उत्तराखंडवासियों से जोड़कर देखा गया और प्रदेश में विरोध शुरू हो गया।
इस बयान के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना राज्य के स्वाभिमान और अलग राज्य के लिए हुए संघर्ष का अपमान है। धामी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का भी जिक्र किया और अखिलेश यादव से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
ज्योति अधिकारी ने क्यों उठाया उत्तराखंड के सम्मान का मुद्दा?
ज्योति अधिकारी ने अपने वीडियो में उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, सैनिकों के योगदान और राज्य आंदोलन के इतिहास का उल्लेख किया। उनका कहना है कि उत्तराखंड के लोगों के सम्मान से जुड़े मामले पर चुप नहीं रहा जा सकता। उन्होंने अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनसे बातचीत कर गलती सुधारने के लिए कहा जाएगा, लेकिन माफी मिलने तक विरोध जारी रहेगा।
ज्योति की टिप्पणी सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गई है। इस मामले में एक ओर उत्तराखंड के कई लोग बयान पर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की ओर से टिप्पणी के संदर्भ को लेकर सफाई भी दी गई है।
समाजवादी पार्टी ने बयान पर क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि अखिलेश यादव की टिप्पणी उत्तराखंड के पूरे समाज के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संदर्भ में थी। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. एस. सचान ने भी कहा कि ‘घुसपैठिया’ शब्द उत्तराखंड के लोगों के लिए नहीं इस्तेमाल किया गया था और इस बयान को लेकर खेद जताया। पार्टी के प्रवक्ताओं ने उत्तराखंड के लोगों के प्रति सम्मान और राज्य से भावनात्मक संबंध होने की बात भी कही।
हालांकि, इस सफाई के बावजूद विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने अखिलेश यादव से सार्वजनिक माफी की मांग की।
उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन, माफी की मांग तेज
अखिलेश यादव की टिप्पणी के विरोध में देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, ऋषिकेश और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन होने की खबरें सामने आईं। गाजियाबाद के इंदिरापुरम में भी उत्तराखंडी समाज के लोगों ने विरोध जताया और ज्ञापन देकर सार्वजनिक माफी की मांग की।
फिलहाल, इस विवाद के केंद्र में बयान का संदर्भ, उत्तराखंड के लोगों की भावनाएं और समाजवादी पार्टी की सफाई है। ज्योति अधिकारी ने अपने अंदाज में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए माफी की मांग दोहराई है। आगे विवाद किस दिशा में जाता है, यह संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और बयान पर उनकी अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।