यूपी पंचायत चुनाव: वोटर बनने के लिए गांव में 6 महीने रहना जरूरी, योगी कैबिनेट की मंजूरी
लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026 | उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के नियमों में अहम बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी गई है। नई व्यवस्था के तहत किसी ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए संबंधित क्षेत्र में कम से कम छह महीने से सामान्य रूप से निवास करना जरूरी होगा। पहले सामान्य निवास की कोई निश्चित अवधि स्पष्ट नहीं थी। सरकार का कहना है कि इस फैसले से मतदाता सूची तैयार करने में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवास संबंधी विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
अब संशोधन कर तय किया है कि निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची की तरह पंचायत राज की मतदाता सूची में 18 वर्ष की आयु का व्यक्ति जो सामान्य तौर पर 6 महीने या इससे ज्यादा समय से गांव में निवास करता हो उसे मतदाता बनाया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026 के अनुसार, अब पंचायत चुनाव में मतदाता बनने के लिए किसी भी व्यक्ति को गांव में 6 महीने रहने के साथ-साथ गांव में स्थायी रूप से रहने की इच्छा भी जाहिर करनी होगी। उसे निवास के रूप में बिजली बिल, टेलीफोन बिल, आधार कार्ड या अन्य डॉक्यूमेंट्स दिखाने होंगे।
वोटर बनने के लिए कौन-से दस्तावेज जरूरी होंगे?
मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए संबंधित गांव में निवास का प्रमाण देना पड़ सकता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसके लिए निम्न दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है:
- आधार कार्ड पर दर्ज संबंधित पते का प्रमाण
- बिजली का बिल
- टेलीफोन बिल
- निवास साबित करने वाले अन्य वैध दस्तावेज
दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अधिकारी यह तय करेंगे कि आवेदक वास्तव में उस ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी है या नहीं। अंतिम निर्णय लागू नियमों और उपलब्ध तथ्यों के अनुसार होगा।
दूसरी ग्राम पंचायत में नाम जुड़वाने पर क्या होगा?
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे गांव में कम से कम छह महीने से सामान्य रूप से रह रहा है और वहां की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना चाहता है, तो उसे पुराने निवास स्थान की मतदाता सूची से अपना नाम हटवाना होगा।
इससे एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों में दर्ज होने की समस्या पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया संबंधित चुनावी नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तय हुई निवास की अवधि
पंचायत चुनावों में मतदाता सूची तैयार करने के दौरान पहले भी यह सवाल उठा था कि किसी व्यक्ति को किसी ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी मानने के लिए किन आधारों पर निर्णय लिया जाए। वर्ष 2015 के पंचायत निर्वाचन से जुड़े विवादों में यह मुद्दा सामने आया था और मामला अदालत तक पहुंचा।
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 9 में मतदाता सूची और सामान्य निवास से जुड़े प्रावधान हैं। अब नई नियमावली के माध्यम से सामान्य निवास की अवधारणा को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। इससे अधिकारियों को मतदाता सूची से संबंधित आवेदनों और विवादों पर एक समान आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पंचायत चुनाव से पहले क्यों अहम है यह फैसला?
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची से जुड़ा यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की पहचान चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा है।
सरकार को उम्मीद है कि छह महीने के सामान्य निवास का स्पष्ट मानक लागू होने से मतदाता सूची में नाम शामिल करने को लेकर विवाद कम होंगे। साथ ही, चुनाव अधिकारियों को आवेदन स्वीकार करने या अस्वीकार करने के फैसले में एकरूपता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हालांकि, मतदाता बनने के लिए निर्धारित न्यूनतम उम्र सहित अन्य कानूनी पात्रताएं भी लागू रहेंगी। केवल छह महीने निवास करना अपने आप में मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की गारंटी नहीं है; आवेदक को बाकी आवश्यक शर्तें भी पूरी करनी होंगी।