बिहार MLC चुनाव: 8 सीटों पर घमासान, सम्राट चौधरी की साख दांव पर

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पटना, 22 अक्टूबर 2026। बिहार की राजनीति में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाला मतदान राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आरा और बांकीपुर में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है। ऐसे में इन सीटों पर होने वाला मतदान राज्य सरकार, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष की रणनीति के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया है।

इन चुनावों को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए एक राजनीतिक लिटमस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, विधान परिषद चुनाव का परिणाम केवल मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर जनमत नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसमें सीटों की प्रकृति, मतदाता समूह, स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों की भूमिका भी अहम होती है।

आरा और बांकीपुर में भाजपा को लगा करारा झटका

हाल के स्थानीय और उपचुनावों में भाजपा को अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी हार का स्वाद चखना पड़ा है। आरा एमएलसी सीट पर जहां राजद ने सफलता पाई, वहीं बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के चीफ और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने जीत दर्ज करके भाजपा के पारंपरिक गणित को ध्वस्त कर दिया। बांकीपुर की हार को भाजपा के लिए बड़ा सेटबैक माना गया था। इस बार एमएलसी चुनाव में प्रशांत किशोर की एंट्री ने गुमनाम चुनाव को हाई प्रोफाइल बना दिया है।

8 MLC सीटों पर मुकाबला क्यों है अहम?

बिहार विधान परिषद राज्य की द्विसदनीय विधायिका का उच्च सदन है। इसके चुनावों में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और श्रेणियों के अनुसार प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इसलिए सभी सीटों का राजनीतिक समीकरण एक जैसा नहीं होता।

आठ सीटों पर मतदान के जरिए राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक ताकत, उम्मीदवारों के समर्थन और स्थानीय स्तर पर गठबंधन की स्थिति को परख सकेंगे। चुनावी नतीजे विधान परिषद में दलों की स्थिति पर भी असर डाल सकते हैं।

सम्राट चौधरी के नेतृत्व की परीक्षा कैसे होगी?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए यह चुनाव राजनीतिक प्रबंधन और गठबंधन के तालमेल के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। उम्मीदवारों के चयन, सहयोगी दलों के बीच समन्वय और मतदान के दौरान समर्थन बनाए रखना दलों की रणनीति का हिस्सा होगा।

वहीं, विपक्ष के लिए भी यह चुनाव अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने और सत्तारूढ़ गठबंधन को चुनौती देने का अवसर हो सकता है। अंतिम तस्वीर मतदान और आधिकारिक नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगी।

पटना और सारण सीटों पर गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा

इस चुनाव में पटना स्नातक और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र खास चर्चा में हैं। पटना में जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार को पार्टी के विधायक अनंत सिंह की ओर से जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन किए जाने से गठबंधन के भीतर मतभेद सामने आए हैं। वहीं, सारण में राष्ट्रीय लोक मोर्चा से जुड़े राम पुकार सिन्हा के निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने से एनडीए के सामने चुनौती पैदा हुई थी।

कब होगी वोटिंग और कब आएगा परिणाम?

बिहार विधान परिषद की चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।

इस चुनाव में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने विपक्षी दलों से मुकाबले के साथ-साथ एनडीए के घटक दलों के बीच समन्वय बनाए रखने की भी चुनौती है। मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा कि गठबंधन अपने उम्मीदवारों के पक्ष में कितना समर्थन जुटा पाता है।

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