नई दिल्ली,21 अक्टूबर 202 | दिल्ली-NCR में महंगी कारों की चोरी करने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ दिल्ली पुलिस की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) ने बड़ी कार्रवाई की है। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की टीम ने पंजाब के अमृतसर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे और निशानदेही पर चोरी की पांच कारें बरामद की हैं। इनमें चार हुंडई क्रेटा और एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर शामिल है।
पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई से दिल्ली में दर्ज वाहन चोरी के पांच मामलों को सुलझाने में मदद मिली है। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी दिल्ली-NCR से गाड़ियां चोरी करने के बाद उन्हें पंजाब में बेचने के नेटवर्क से जुड़े थे।
डीसीपी रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि यह गैंग दिल्ली एनसीआर से लग्जरी गाड़ियां चुराकर उस पर फेक नंबर प्लेट लगाकर पंजाब ले जाता था और फिर वहां आगे डिस्पोजल करता था। राजेंद्र नगर से चोरी हुई एक क्रेटा गाड़ी के बारे में पुलिस को शिकायत मिली थी। जिसमें मामला दर्ज करके छानबीन शुरू की गई। एएटीएस की टीम को आगे की जांच के लिए लगाया गया।
अमृतसर से पकड़े गए शमशेर और रिंकू
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शमशेर, उम्र 33 वर्ष, और रिंकू उर्फ रिंकी, उम्र 39 वर्ष, के रूप में की है। दोनों पंजाब के अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु के रहने वाले बताए गए हैं।
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट AATS टीम ने वाहन चोरी के मामलों की जांच के दौरान तकनीकी निगरानी और CCTV फुटेज की मदद ली। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को आरोपियों के पंजाब में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद अमृतसर में कार्रवाई की गई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी की गई कारें किन लोगों को बेची जानी थीं और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन शामिल हो सकता है।
चार क्रेटा और एक स्विफ्ट डिजायर बरामद
इस कार्रवाई में बरामद पांच कारों में चार हुंडई क्रेटा और एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, ये वाहन दिल्ली-NCR में चोरी किए गए थे। बरामदगी के आधार पर पांच वाहन चोरी के मामलों को सुलझाने का दावा किया गया है।
महंगी SUV को निशाना बनाना ऐसे गिरोहों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि चोरी के बाद उन्हें दूसरे राज्यों में बेचने की कोशिश की जाती है। हालांकि, इस मामले में आरोपियों ने गाड़ियों को किस तरीके से चोरी किया और बिक्री के लिए किन लोगों से संपर्क किया, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद सामने आएगी।
वाहन चोरी के मामलों में CCTV फुटेज, तकनीकी निगरानी और गाड़ियों के रिकॉर्ड की जांच अहम भूमिका निभाते हैं। इस मामले में भी पुलिस ने इन्हीं तरीकों की मदद से संदिग्धों तक पहुंचने की बात कही है।
जांच एजेंसी अब बरामद वाहनों के मूल रिकॉर्ड, चोरी की तारीखों और आरोपियों के संभावित संपर्कों की पड़ताल कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दोनों आरोपी अकेले काम कर रहे थे या चोरी और बिक्री के लिए उनका कोई संगठित नेटवर्क भी था।
दिल्ली-NCR में वाहन चोरी रोकने की चुनौती
दिल्ली और आसपास के इलाकों में वाहन चोरी पुलिस के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। चोरी की गाड़ियों को दूसरे राज्यों में ले जाकर बेचने की कोशिश जांच को जटिल बना सकती है। ऐसे मामलों में अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय और वाहन की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं।
AATS की इस कार्रवाई के बाद पुलिस की नजर अब गिरोह के संभावित अन्य सदस्यों और चोरी की कारों के खरीदारों पर है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों में आगे की कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।