बदायूं की रामलीला में अश्लील डांस का आरोप, सभासद ने कमेटी के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की

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बदायूं, 20 अक्टूबर 2026 | उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के बिल्सी में रामलीला महोत्सव के दौरान मंच पर कथित अश्लील डांस कराए जाने का मामला सामने आया है। इसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय सभासद उमेश बाबू वार्ष्णेय ने कोतवाली पुलिस को शिकायत देकर रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों और कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है। शिकायत के बाद मामला चर्चा में है और पुलिस की कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं।

आस्था का मंच या मनोरंजन का अखाड़ा?

यह विवाद केवल नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उस मंच की गरिमा से जुड़ा है, जहां भगवान श्रीराम और हनुमान जी के चित्र लगे होने की बात कही गई है। धार्मिक आस्था रखने वालों का आरोप है कि रामलीला जैसे पारंपरिक आयोजन में इस तरह के कार्यक्रम धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकते हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि आयोजन धार्मिक मर्यादाओं और प्रशासनिक अनुमति की शर्तों के तहत हो रहा है, तो मंच पर ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति कैसे मिली?

सभासद उमेश बाबू वार्ष्णेय ने पुलिस से की शिकायत

इस मामले में सभासद उमेश बाबू वार्ष्णेय ने कोतवाली पुलिस को प्रार्थना पत्र सौंपा है। उन्होंने रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता चाहते हैं कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायत और कार्रवाई की मांग का उल्लेख है; पुलिस की ओर से अंतिम निष्कर्ष या दोष तय होने की पुष्टि नहीं हुई है।

बदायूं का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रामलीला और धार्मिक आयोजनों के दौरान नृत्य प्रस्तुतियों को लेकर विवाद हुए हैं। सोनभद्र में रामलीला मंच पर कथित अश्लील गानों पर डांस का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आयोजन समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। वहीं, बिजनौर में भी रामलीला के दौरान नृत्य कार्यक्रम को लेकर पुलिस और आयोजन समिति के बीच विवाद सामने आया।

इन घटनाओं ने धार्मिक आयोजनों में मनोरंजन कार्यक्रमों की सीमा, आयोजकों की जिम्मेदारी और पुलिस की भूमिका को लेकर बहस तेज की है। हालांकि, हर मामले के तथ्य अलग हैं और किसी एक घटना के आधार पर दूसरे मामले में दोष तय नहीं किया जा सकता।

पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी आगे की कार्रवाई

बिल्सी के मामले में अब शिकायत पर पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान कार्यक्रम की प्रकृति, उपलब्ध वीडियो या अन्य साक्ष्य और आयोजकों का पक्ष सामने आने पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल सभासद ने शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। मामले में पुलिस की ओर से किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने आने तक आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

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