नोएडा में सस्ते घरों की उम्मीद बढ़ी, ₹9 लाख तक के LIG फ्लैट; बिल्डरों को 10% EWS आवास बनाने होंगे

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नोएडा , 19 अक्टूबर 2026 । नोएडा और आसपास के इलाकों में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे कम आय वाले परिवारों के लिए सस्ते आवास को लेकर उम्मीद बढ़ी है। नई रिपोर्ट के मुताबिक, आवासीय परियोजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए फ्लैट बनाने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बिल्डरों को निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी परियोजनाओं में 10 प्रतिशत फ्लैट EWS श्रेणी के लिए और 10 प्रतिशत LIG श्रेणी के लिए रखने होते हैं। इन श्रेणियों के लिए बताई गई कीमतें क्रमशः करीब ₹6 लाख और ₹9 लाख तक हैं। हालांकि, नोएडा और गाजियाबाद की नीतियों में अंतर हो सकता है, इसलिए योजना का वास्तविक दायरा और पात्रता संबंधित प्राधिकरण के नियमों से तय होगी।

30 से 45 वर्गमीटर कारपेट एरिया

नई नियमावली में यह भी प्रावधान रखा गया है कि चार हेक्टेयर से छोटे आवासीय प्रोजेक्ट में डेवलपर चाहे तो शेल्टर फीस जमा कर सकता है। लेकिन इस राशि के बदले प्राधिकरण को उतने ही किफायती फ्लैट निर्मित कराने होंगे। इसके साथ ही फ्लैटों के आकार और पार्किंग संबंधी मानक भी तय कर दिए गए हैं। ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट का कारपेट एरिया 30 से 35 वर्गमीटर रहेगा, जबकि एलआईजी श्रेणी के फ्लैट का कारपेट एरिया 35 से 45 वर्गमीटर तय किया गया है।

₹9 लाख तक में मिल सकता है LIG फ्लैट

कम कीमत वाले आवास की व्यवस्था के तहत LIG श्रेणी के फ्लैट की कीमत लगभग ₹9 लाख और EWS श्रेणी के फ्लैट की कीमत करीब ₹6 लाख बताई गई है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) से संबंधित रिपोर्टों में इन श्रेणियों के लिए अलग-अलग आकार और कीमतों का उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, EWS फ्लैट का आकार लगभग 24 से 36 वर्गमीटर और LIG फ्लैट का आकार 40 से 60 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। हालांकि, इन कीमतों और आकारों को सीधे नोएडा के हर आवासीय प्रोजेक्ट पर लागू मानना सही नहीं होगा। नोएडा प्राधिकरण की योजना, परियोजना और पात्रता के नियमों की अलग से पुष्टि जरूरी है।

बिल्डरों को 10 प्रतिशत EWS और 10 प्रतिशत LIG फ्लैट बनाने होंगे

रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित नियमों के तहत ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में बिल्डरों को कुल फ्लैटों का 10 प्रतिशत EWS और 10 प्रतिशत LIG श्रेणी के लिए बनाना होता है। इसका उद्देश्य कम आय वाले परिवारों को भी आवासीय परियोजनाओं में घर पाने का अवसर उपलब्ध कराना है।

प्राधिकरणों की ओर से नक्शा मंजूर करने और परियोजना की प्रगति की निगरानी के दौरान इन प्रावधानों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, कुछ परियोजनाओं में नियमों के अनुपालन, निर्माण में देरी और फ्लैट आवंटन को लेकर शिकायतें भी सामने आई हैं।

सस्ते फ्लैटों के निर्माण में देरी भी बड़ी चुनौती

सस्ते घरों की योजनाओं का लाभ तभी मिल सकेगा, जब बिल्डर समय पर फ्लैट तैयार करके पात्र परिवारों को उनका आवंटन और कब्जा दें। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से संबंधित एक रिपोर्ट में EWS और LIG फ्लैटों के निर्माण तथा आवंटन में देरी का मुद्दा सामने आया था। इसके बाद प्राधिकरण ने स्थिति की जांच के लिए समिति गठित की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन बिल्डरों ने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया, उनसे जवाब मांगे जाने और जरूरत पड़ने पर परियोजना की मंजूरी पर कार्रवाई करने की बात कही गई थी। इससे साफ है कि सस्ती आवास योजनाओं की सफलता के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके पालन की निगरानी भी जरूरी है।

नोएडा के लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

कम कीमत वाले फ्लैट के लिए आवेदन करने से पहले लोगों को संबंधित प्राधिकरण की आधिकारिक योजना, आय सीमा, पात्रता शर्तें, आवेदन की तारीख और आवंटन प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। यह भी जांचना जरूरी है कि फ्लैट नोएडा प्राधिकरण के क्षेत्र में है या किसी दूसरे विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आता है।

₹6 लाख या ₹9 लाख की कीमत का उल्लेख हर परियोजना में तत्काल उपलब्ध फ्लैट या खुली आवेदन प्रक्रिया की गारंटी नहीं है। पात्रता और उपलब्धता की पुष्टि आधिकारिक नोटिस से ही करनी चाहिए।

सस्ते आवास से आम परिवारों को क्या फायदा हो सकता है?

यदि EWS और LIG आवासों का निर्माण तथा आवंटन नियमों के अनुसार होता है, तो इससे सीमित आय वाले परिवारों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर घर पाने का अवसर मिल सकता है। इससे किराये के घर पर निर्भर परिवारों को भी भविष्य में अपना मकान खरीदने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि नोएडा के लिए लागू आधिकारिक नियमों और उपलब्ध योजनाओं की पुष्टि की जाए। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में कितने फ्लैट उपलब्ध होंगे और इच्छुक परिवार आवेदन कैसे कर सकेंगे।

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