नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026 |भारतीय सेना की संचार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में GSAT-7B सैटेलाइट एक महत्वपूर्ण परियोजना है। 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी कारणों से इस सैटेलाइट का प्रक्षेपण लगभग छह महीने आगे बढ़ गया है। अब इसे वर्ष 2028 के मध्य तक अंतरिक्ष में भेजे जाने की उम्मीद है।
यह लगभग पांच टन वजनी भूस्थिर संचार उपग्रह होगा, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया जाना है। इसका उद्देश्य सेना को सुरक्षित और भरोसेमंद संचार सुविधा उपलब्ध कराना है।
रक्षा मंत्रालय ने 29 मार्च 2023 को GSAT-7B के लिए NewSpace India Limited (NSIL) के साथ लगभग 2,963 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। यह परियोजना स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सैटेलाइट के जरिए सैनिकों, सैन्य मुख्यालयों, हथियार प्रणालियों और हवाई प्लेटफॉर्म के बीच लंबी दूरी तक संचार संभव होगा। खासकर ऐसे सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में यह उपयोगी साबित हो सकता है, जहां सामान्य संचार नेटवर्क सीमित हैं।
इस परियोजना के पूरा होने से भारतीय सेना की परिचालन क्षमता और संचार व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ प्रक्षेपण और परिचालन शुरू होने के बाद स्पष्ट होंगे।