बिहार में नीतीश सरकार पर सवाल, केंद्र में NDA के साथ चिराग पासवान

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पटना, 15 अक्टूबर 2026 । बिहार की राजनीति में केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान का रुख इन दिनों चर्चा में है। एक ओर वह बिहार में NDA सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ गठबंधन में बने हुए हैं। यही वजह है कि उनकी राजनीति को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या चिराग पासवान बिहार में अपनी अलग पहचान मजबूत करने और केंद्र में गठबंधन का हिस्सा बने रहने की रणनीति पर काम कर रहे हैं?

चिराग का यह रुख गठबंधन की राजनीति के उस पहलू को दिखाता है, जिसमें सहयोगी दल सरकार का समर्थन करते हुए भी कुछ मुद्दों पर अपनी अलग राय रखते हैं। हालांकि, उनकी मंशा के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय उनके बयानों, पार्टी की राजनीतिक स्थिति और हालिया घटनाक्रम को देखना जरूरी है।

केंद्र सरकार का पक्ष और चिराग

अब हाल ही में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की ओर से एस.आई.आर के प्लेटफार्म पर दिए गए बयान का निहितार्थ समझे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन पर यह तो कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सबका अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्व राजनीतिक फायदे के लिए माहौल बिगाड़ने और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां शांतिपूर्ण आंदोलन करने की अनुमति हमेशा रही है, लेकिन प्रदर्शन की आड़ में अराजकता फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।

बिहार सरकार पर सवाल, लेकिन केंद्र से गठबंधन बरकरार

चिराग पासवान ने बिहार में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। सितंबर 2026 के आखिर में उन्होंने राज्य की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्हें बिहार NDA सरकार का हिस्सा होने पर शर्म महसूस होती है। उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हुई कि वह राज्य सरकार से अपनी असहमति सार्वजनिक रूप से क्यों जाहिर कर रहे हैं।

इस रुख का एक राजनीतिक पहलू यह भी है कि बिहार में राज्य सरकार के कामकाज की आलोचना करके चिराग अपनी पार्टी को गठबंधन के अन्य दलों से अलग दिखा सकते हैं। इससे उनके समर्थकों के सामने यह संदेश जाता है कि पार्टी केवल गठबंधन में शामिल होने के कारण हर फैसले का समर्थन नहीं करती।

क्या गठबंधन के भीतर दबाव बनाने की कोशिश है?

गठबंधन की राजनीति में सहयोगी दलों के लिए अपनी मांगों और राजनीतिक महत्व को बनाए रखना अहम होता है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के पास लोकसभा में पांच सांसद हैं। बिहार की राजनीति में भी पार्टी अपनी अलग जगह बनाए रखना चाहती है। ऐसे में राज्य सरकार के कामकाज पर मुखर होकर सवाल उठाना गठबंधन के भीतर अपनी बात मजबूती से रखने का तरीका हो सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी से जुड़े कुछ मुद्दे और मांगें लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। इनमें पासवान समुदाय के युवाओं के लिए चौकीदार और दफादार पदों पर भर्ती तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के नाम पर सड़क और प्रतिमा जैसे प्रतीकात्मक मुद्दे शामिल बताए गए हैं। हालांकि, इन मांगों को चिराग के हर बयान का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।

ऐसे में उनकी राजनीति के दो पहलू नजर आते हैं—एक तरफ केंद्र में NDA के साथ बने रहना और दूसरी तरफ बिहार में अपनी पार्टी की स्वतंत्र आवाज को मजबूत करना। इससे पार्टी को गठबंधन में अपनी भूमिका और भविष्य की राजनीतिक प्राथमिकताओं पर बातचीत करने की गुंजाइश मिल सकती है।

चिराग पासवान की राजनीति में युवा मतदाता और सामाजिक प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण विषय हैं। वह कई मौकों पर युवाओं की समस्याओं, रोजगार और शासन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं। बिहार में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने से वह राज्य के मतदाताओं के सामने खुद को जवाबदेही की मांग करने वाले नेता के रूप में पेश कर सकते हैं।

चिराग पासवान के सामने चुनौती यह है कि वह बिहार में अपनी पार्टी की स्वतंत्र पहचान को कैसे मजबूत करते हैं और साथ ही NDA के साथ अपने संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। उनकी आलोचना का असर राज्य सरकार की नीतियों, गठबंधन के आपसी तालमेल और पार्टी की भविष्य की रणनीति पर किस हद तक पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल, उनके रुख को बिहार में अलग राजनीतिक पहचान बनाने और केंद्र में गठबंधन के साथ बने रहने के बीच संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन इसे किसी तयशुदा ‘गेम प्लान’ का प्रमाण मानने के बजाय उनके सार्वजनिक बयानों और आगे के राजनीतिक फैसलों के आधार पर समझना ज्यादा उचित होगा।

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