नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026 । पंजाब में बारिश और बाढ़ के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अनाज मंडी में पानी भरने से हालात ऐसे बन गए कि वहां नाव चलाने की नौबत आ गई। पानी में फसल तैरती दिखाई देने की खबर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में महीनों की मेहनत के बाद तैयार हुई उपज को सुरक्षित रखना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
अनाज मंडियों में जलभराव होने से फसल के भंडारण, खरीद और परिवहन पर असर पड़ सकता है। खासकर खुले स्थानों पर रखे अनाज के भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगती है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन संबंधित मंडी की स्थिति और प्रशासनिक सर्वेक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
1971 के बाद से अपग्रेड नहीं की गई मंडी
फाजिल्का के आढ़तिया एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव सचदेवा ‘गोल्डी’ ने बताया कि न तो पंजाब सरकार ने फसल को रखने का कोई इंतजाम किया और न ही मंडी में जमा बारिश के पानी को निकालने का कोई सिस्टम है, जिससे उनकी फसल पानी में डूबी हुई है। उन्होंने बताया कि मंडी के बाहर प्रदर्शन करने वालों में भाकियू (लाखोवाल), बीकेयू डकोन्डा जैसे किसान संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि किसान 4 फुट पानी में डूबी फसल को बचाने की स्थिति में नहीं हैं। सचदेवा ने कहा कि पहली बार किसानों को मंडी तक नाव लानी पड़ी क्योंकि आस-पास की सभी सड़कें पानी में डूब गई हैं। किसानों की मेहनत से उगाई गई फसल पानी में तैर रही है। ऐसी हालत आई क्योंकि 1971 में बनने के बाद से मंडी के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड नहीं किया गया है।
अनाज मंडियों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था महत्वपूर्ण है। मंडियों में जमा पानी निकालने, अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखने और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने जैसे कदम नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं।
इसके साथ ही प्रभावित किसानों की फसल का आकलन करना और जरूरत के अनुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है। नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही मुआवजे या अन्य राहत उपायों को लेकर स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
किसानों को मुआवजे और राहत का इंतजार
बारिश और बाढ़ से फसल या भंडारित अनाज को नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक राहत की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए नुकसान का सर्वेक्षण, संबंधित रिकॉर्ड और लागू सरकारी नियम महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रभावित किसानों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि उनकी उपज की खरीद पर क्या असर पड़ा है और नुकसान की भरपाई के लिए कौन-से सहायता विकल्प उपलब्ध हैं। प्रशासनिक स्तर पर समय पर कार्रवाई होने से किसानों की परेशानियां कम करने में मदद मिल सकती है।
पंजाब की अनाज मंडी में पानी भरने और फसल के तैरने की खबर बारिश-बाढ़ से पैदा हुई चुनौतियों को उजागर करती है। किसानों की मेहनत से तैयार उपज को सुरक्षित रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। जलनिकासी, अनाज के सुरक्षित भंडारण और प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन करने जैसे कदम महत्वपूर्ण होंगे। वास्तविक नुकसान और राहत से जुड़ी स्थिति आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।