₹20 की पानी की बोतल ₹50 में बेचना पड़ा भारी, 10 साल बाद उपभोक्ता आयोग का फैसला
पटना, 09 अक्टूबर 2026 । बिहार की राजधानी पटना में सिनेमा हॉल के अंदर पानी की बोतल अधिक कीमत पर बेचने का मामला चर्चा में है। करीब 10 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सिनेपोलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी को कुल ₹85,000 की राशि देने का आदेश दिया है। मामला उस समय शुरू हुआ, जब एक दर्शक ने आरोप लगाया कि उसे बाहर से पानी की बोतल ले जाने से रोका गया और सिनेमा हॉल के अंदर ₹20 की बोतल के लिए ₹50 चुकाने पड़े।
2016 में फिल्म देखने पहुंचे दर्शक ने दर्ज कराई थी शिकायत
यह मामला 23 सितंबर 2016 का है। शिकायतकर्ता रजत तिवारी पटना के सिनेपोलिस थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे थे। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रवेश के समय उन्हें अपनी पानी की बोतल अंदर ले जाने से रोका गया। इसके बाद उन्हें थिएटर परिसर से पानी खरीदना पड़ा, जिसके लिए ₹50 लिए गए, जबकि वही बोतल खुले बाजार में ₹20 की बताई गई।
शिकायतकर्ता ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग ने अब इस विवाद पर आदेश दिया है।
आयोग के अनुसार, उपभोक्ता को बाहर से पानी ले जाने से रोककर परिसर के भीतर अधिक कीमत पर वही उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। इस मामले में आयोग ने सिनेपोलिस और कोका-कोला को जिम्मेदार ठहराते हुए उपभोक्ता हितों की रक्षा से जुड़े निर्देश जारी किए।
सुनवाई के दौरान कंपनियों की ओर से अपने-अपने पक्ष रखे गए। हालांकि, आयोग ने मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दोनों कंपनियों के खिलाफ आदेश पारित किया।
₹85 हजार की राशि में किसे कितना मिलेगा?
आयोग ने कुल ₹85,000 की राशि के भुगतान और जमा करने का निर्देश दिया है। इसमें शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000 क्षतिपूर्ति और कानूनी खर्च के रूप में ₹10,000 देने को कहा गया है। इसके अलावा ₹50,000 राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया गया है।
आदेश के अनुसार, निर्धारित समयसीमा में अनुपालन नहीं होने पर संबंधित राशि पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना पड़ सकता है।
आयोग ने पैकेज्ड पेयजल और अन्य उत्पादों को लेकर भी निर्देश दिए हैं। बोतलों पर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP स्पष्ट और पढ़ने योग्य तरीके से प्रदर्शित होना चाहिए। साथ ही, एक ही उत्पाद के लिए मनमाने ढंग से अलग-अलग कीमत वसूलने की प्रथा पर रोक लगाने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें सिनेमा हॉल, मनोरंजन स्थलों या अन्य परिसरों में बाहर से पानी अथवा खाने-पीने की वस्तुएं ले जाने से रोका जाता है। हालांकि, किसी विशेष मामले में नियमों की लागू होने की स्थिति तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
यह मामला बताता है कि किसी उत्पाद की कीमत या खरीद की शर्तों को लेकर विवाद होने पर उपभोक्ता कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऐसे मामलों में बिल, भुगतान का प्रमाण, उत्पाद पर छपी MRP और घटना से जुड़े अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी होता है।
पटना के इस मामले में शिकायतकर्ता को राहत मिलने में लगभग एक दशक लगा। अब आयोग के आदेश ने अनुचित व्यापार व्यवहार और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।