नई दिल्ली, 09 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए पुनर्वास योजना से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। राजधानी में करीब 12 साल बाद झुग्गी-झोपड़ी यानी JJ क्लस्टरों का व्यापक सर्वे कराया जाएगा। इसका उद्देश्य बस्तियों में रहने वाले परिवारों की वास्तविक संख्या का पता लगाना, पात्र लोगों की पहचान करना और उन्हें पुनर्वास योजना का लाभ पहुंचाना है।
दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ नीति के तहत पात्र परिवारों को मौजूदा बस्ती के आसपास ही पक्के फ्लैट देने पर जोर दिया जाएगा। पुनर्वास के लिए पात्रता की कट-ऑफ तारीख 1 जनवरी 2025 तय की गई है। हालांकि, सर्वे में नाम आने भर से मकान मिलना सुनिश्चित नहीं होगा। इसके लिए निर्धारित शर्तों और दस्तावेजों की जांच भी जरूरी होगी।
‘इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल’ के तहत दिए जाएंगे फ्लैट: आशीष सूद
मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली की बीजेपी सरकार ने पुनर्वास के नियमों का दायरा बढ़ाया है ताकि 2014 के बाद झुग्गी में आए लोगों को भी सम्मानजनक घर मिल सकें। योग्य परिवारों को ‘इन-सीटू डेवलपमेंट मॉडल’ के तहत फ्लैट दिए जाएंगे, जिसका मतलब है कि उन्हें उसी जगह के पास बसाया जाएगा जहां वे अभी रह रहे हैं। दिल्ली सरकार के 2014 के पिछले बड़े सर्वे में लगभग 700 जेजे बस्तियों और करीब 3.3 लाख परिवारों की पहचान की गई थी। अभी सरकार के पास झुग्गी क्लस्टर या उनमें रहने वाले परिवारों की संख्या के बारे में कोई वेरिफाइड आंकड़े नहीं हैं।
12 साल बाद क्यों कराया जा रहा है सर्वे?
दिल्ली में झुग्गी-बस्तियों का पिछला व्यापक सर्वे वर्ष 2014 में हुआ था। उस समय करीब 700 JJ बस्तियों और लगभग 3.3 लाख परिवारों की पहचान की गई थी। इसके बाद राजधानी में कई नई बस्तियां विकसित हुईं और पुरानी बस्तियों में भी परिवारों की संख्या बढ़ी।
सरकार के पास अब सभी बस्तियों और उनमें रहने वाले परिवारों की अद्यतन, सत्यापित संख्या उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नया सर्वे कराकर यह पता लगाया जाएगा कि किन इलाकों में कितने परिवार रहते हैं और उनमें से कितने पुनर्वास के लिए पात्र हो सकते हैं।
शहरी विकास मंत्री आशीष सूद के मुताबिक, सर्वे अगले कुछ सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। इसके जरिए पुनर्वास योजना को लागू करने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाए जाएंगे।
पुनर्वास के लिए अब 2025 होगी कट-ऑफ तारीख
इस योजना में सबसे अहम बदलाव पात्रता की कट-ऑफ तारीख को लेकर है। दिल्ली सरकार ने झुग्गी-बस्ती पुनर्वास के लिए तारीख को बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 करने का फैसला किया है। इससे पहले की व्यवस्था में पात्रता के लिए अधिक पुरानी तारीख लागू थी।
नई व्यवस्था के तहत 1 जनवरी 2025 तक अस्तित्व में रही बस्तियों के पात्र निवासियों को पुनर्वास के दायरे में लाने का लक्ष्य है। इससे उन परिवारों को भी लाभ मिलने की संभावना बनेगी, जो पहले कट-ऑफ तारीख की वजह से योजना से बाहर रह गए थे।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर झुग्गी निवासी को बिना किसी जांच के फ्लैट मिल जाएगा। संबंधित परिवार को निवास, बस्ती और अन्य निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।
सर्वे के दौरान अधिकारियों को यह सत्यापित करना होगा कि संबंधित परिवार कट-ऑफ तारीख से पहले से बस्ती में रह रहा था या नहीं। इसके लिए वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड और बिजली बिल जैसे दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
परिवारों को सलाह है कि वे अपने उपलब्ध निवास संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखें। सर्वे शुरू होने के बाद प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही जानकारी और कागजात जमा करें।
सिर्फ सर्वे में जानकारी दर्ज होना पुनर्वास की अंतिम मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए। पात्रता का निर्णय दस्तावेजों और लागू नीति के आधार पर होगा।
‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ योजना में क्या मिलेगा?
पुनर्वास योजना का उद्देश्य पात्र झुग्गीवासियों को बेहतर आवास और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत बहुमंजिला फ्लैट देने की योजना है। सरकार की प्राथमिकता यह भी है कि संभव होने पर परिवारों को उनकी मौजूदा बस्ती के नजदीक ही बसाया जाए।
नई पुनर्वास कॉलोनियों में केवल मकान ही नहीं, बल्कि जरूरी नागरिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इनमें स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और बच्चों के खेलने के लिए मैदान जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
योजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके जरिए बस्तियों के पुनर्विकास और पात्र परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, नई पुनर्वास नीति से करीब 4 से 5 लाख परिवारों यानी लगभग 20 लाख लोगों को लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक लाभार्थियों की संख्या सर्वे, दस्तावेजों के सत्यापन और पात्रता निर्धारण के बाद ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली में फिलहाल लगभग 675 आधिकारिक JJ क्लस्टर दर्ज हैं, जबकि कुछ अनुमानों में इनकी वास्तविक संख्या इससे अधिक बताई जाती है। नए सर्वे के जरिए बस्तियों की स्थिति और उनमें रहने वाले परिवारों की संख्या का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।
DDA और DUSIB की क्या होगी भूमिका?
दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड यानी DUSIB पुनर्वास योजना के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाएंगे। दोनों एजेंसियों को बस्तियों के पुनर्विकास और आवास परियोजनाओं के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने PPP मॉडल के तहत बस्तियों के पुनर्वास की परियोजनाओं के लिए टेंडर जारी करने और आगे की योजना तैयार करने पर जोर दिया है। इससे यह तय होगा कि किन बस्तियों में पहले काम शुरू होगा और किन परिवारों को किस चरण में पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा।
झुग्गीवासियों को अब क्या करना चाहिए?
सर्वे शुरू होने तक झुग्गी-बस्ती में रहने वाले परिवारों को अपने निवास से जुड़े दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए। सर्वे के दौरान सही जानकारी देना और प्रशासन की ओर से मांगे गए प्रमाण उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
परिवारों को किसी अनधिकृत व्यक्ति को मकान दिलाने के नाम पर पैसे देने से बचना चाहिए। सर्वे की तारीख, पात्रता की विस्तृत शर्तें, आवेदन प्रक्रिया और संभावित शुल्क की जानकारी संबंधित सरकारी विभागों की आधिकारिक घोषणाओं से ही जांचनी चाहिए।
कुल मिलाकर, 12 साल बाद होने वाला यह सर्वे दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों की मौजूदा स्थिति का नया रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन पात्र परिवारों को मकान कब और किस चरण में मिलेगा, यह सर्वे और पुनर्वास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के बाद स्पष्ट होगा।