जींद , 06 अक्टूबर 2026 । हरियाणा के जींद में इस बार दशहरा उत्सव में रावण का पुतला लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनने वाला है। यहां करीब 45 फीट ऊंचा ऐसा रावण तैयार किया जा रहा है, जिसमें पारंपरिक पुतले के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। रावण की गर्दन घूमेगी, आंखें हिलती हुई दिखाई देंगी और उसका चेहरा हंसता हुआ नजर आएगा।
दशहरा नजदीक आने के साथ ही पुतले तैयार करने वाले कारीगर दिन-रात काम में जुटे हैं। रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं। इन तीनों पुतलों को बनाने में करीब एक महीने का समय लग रहा है।
पुतले बनाने वालों ने क्या बताया
पुतले बनाने में जुटे संजय, खरेतीलाल और पूरनलाल ने बताया कि इस बार कुंभकर्ण के पुतले में भी खास प्रयोग किया जा रहा है। कुंभकर्ण की आंखों में जिंदा कबूतर डालने की तैयारी है। उनका कहना है कि रावण के पुतले में आग लगाए जाने के बाद कबूतरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। इस प्रयोग को लेकर पुतले में विशेष व्यवस्था की जा रही है। उनका दावा है कि दशहरा उत्सव के दौरान यह लोगों के लिए सबसे ज्यादा कौतूहल वाला दृश्य होगा।
इस बार रावण की ऊंचाई करीब 45 फीट रखी जा रही है। वहीं कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले करीब 40-40 फीट ऊंचे होंगे। तीनों पुतलों को एक साथ तैयार किया जा रहा है।
पुतलों के ढांचे में बांस, रस्सी, कागज और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। ढांचा तैयार होने के बाद चेहरे, कपड़े और सजावट का काम पूरा किया जाएगा। इसके बाद तकनीकी हिस्सों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
छह-सात कारीगर मिलकर कर रहे तैयारी
स्मार्ट रावण समेत तीनों पुतलों को तैयार करने में छह से सात कारीगर और परिवार के सदस्य जुटे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुतले बनाने वाले परिवार की इस काम से लंबे समय से जुड़ी परंपरा रही है।
कारीगरों के लिए दशहरा आने से पहले का समय सबसे ज्यादा व्यस्त रहता है। पुतलों का ढांचा तैयार करने से लेकर रंग-रोगन, कपड़े, चेहरे और तकनीकी उपकरण लगाने तक कई चरणों में काम किया जाता है।
डेढ़ लाख रुपये के आसपास खर्च
जींद में इस बार रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के तीनों पुतलों को तैयार करने पर करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इसमें पुतलों की निर्माण सामग्री के साथ-साथ उनके विशेष डिजाइन और तकनीकी प्रयोग भी शामिल हैं।
कारीगरों का उद्देश्य पारंपरिक दशहरा आयोजन में कुछ नया जोड़ना है। इसी वजह से रावण के चेहरे और शरीर में मूवमेंट देने की व्यवस्था की गई है।
जींद में रावण के पुतले को तकनीक से जोड़ने का प्रयोग नया नहीं है। 2025 में भी यहां रावण के पुतले को आंखों से देखने और मुंह से बोलने जैसा प्रभाव देने की तैयारी की गई थी। उस समय अर्जुन स्टेडियम में करीब 50 फीट ऊंचे रावण का पुतला तैयार किया गया था।
इस बार तकनीकी प्रयोग को आगे बढ़ाते हुए गर्दन और आंखों की हलचल के साथ चेहरे के भाव को भी आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है।
दशहरा पर लोगों के लिए बनेगा खास आकर्षण
दशहरा केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि स्थानीय मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों का भी बड़ा अवसर होता है। ऐसे में जींद का स्मार्ट रावण लोगों की उत्सुकता बढ़ा सकता है।
रावण दहन के समय जब पुतले में गर्दन और आंखों की हलचल दिखाई देगी, उसके बाद अग्नि के बीच उसका दहन किया जाएगा। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक दशहरा परंपरा का यह मेल इस बार जींद के आयोजन को खास बना रहा है।