हरियाणा के नूंह में एक छत के नीचे दो सियासी रंग, पिता बीजेपी के साथ तो बेटा संभाल रहा INLD की कमान

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नई दिल्ली, 05 अक्टूबर 2026 । हरियाणा के नूंह यानी मेवात की राजनीति में इन दिनों एक परिवार की अलग-अलग राजनीतिक राह चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ही परिवार में पिता और बेटा अलग-अलग दलों के साथ सक्रिय हैं। पिता चौधरी जाकिर हुसैन बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं, जबकि उनके बेटे ताहिर हुसैन इंडियन नेशनल लोकदल यानी INLD के नूंह जिला अध्यक्ष हैं।

यह राजनीतिक स्थिति इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि दोनों की सक्रियता अपने-अपने दलों के साथ जुड़ी हुई है। ऐसे में नूंह की स्थानीय राजनीति में यह परिवार एक अलग तरह के राजनीतिक समीकरण का उदाहरण बन गया है।

क्यों सुर्खियों में आए बाप-बेटा

बीते 27 सितंबर को नूंह में आयोजित आईएनएलडी के सम्मान दिवस समारोह में जिला अध्यक्ष एडवोकेट ताहिर हुसैन प्रदेश स्तर का कार्यक्रम होने के बाद भी अपेक्षित भीड़ नहीं जुटा पाए। लेकिन रैली के बाद एक बार फिर ताहिर हुसैन और उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका चर्चा में आ गई है। ताहिर हुसैन आईएनएलडी के नूंह जिला अध्यक्ष हैं, जबकि उनके पिता चौधरी जाकिर हुसैन हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक और बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं।

पिता बीजेपी में, बेटा INLD के साथ

चौधरी जाकिर हुसैन मेवात की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। हरियाणा विधानसभा के रिकॉर्ड के मुताबिक वह नूंह से तीन बार विधायक रह चुके हैं और 2014 में INLD के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे।

वहीं उनके बेटे ताहिर हुसैन ने अलग राजनीतिक रास्ता चुना। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में वह नूंह सीट से INLD के उम्मीदवार थे। चुनावी हलफनामे के अनुसार वह पेशे से अधिवक्ता और कृषि से जुड़े हैं तथा उनके पास पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री है।

इस तरह एक ही परिवार में पिता और बेटे की राजनीतिक पहचान अलग-अलग दलों से जुड़ गई।

2024 चुनाव में भी दिखा था यह सियासी समीकरण

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 के दौरान नूंह सीट पर ताहिर हुसैन INLD के उम्मीदवार थे। चुनावी रिकॉर्ड में इस सीट पर कांग्रेस के आफताब अहमद, बीजेपी के संजय सिंह और INLD के ताहिर हुसैन समेत कई उम्मीदवार मैदान में थे।

उस चुनाव के दौरान पिता-पुत्र की अलग-अलग राजनीतिक भूमिका भी चर्चा में रही थी। स्थानीय राजनीति में यह सवाल उठता रहा कि परिवार की राजनीतिक गतिविधियों का दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर क्या असर पड़ता है।

हालांकि, अलग-अलग दलों में होना अपने आप में किसी राजनीतिक समझौते या अंदरूनी तालमेल का प्रमाण नहीं है। दोनों नेताओं की राजनीतिक भूमिका को उनके संबंधित दलों की गतिविधियों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

नूंह की राजनीति में परिवार की अहम मौजूदगी

नूंह और मेवात की राजनीति में जाकिर हुसैन परिवार की पुरानी राजनीतिक मौजूदगी रही है। जाकिर हुसैन नूंह से तीन बार विधायक रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर में 1991, 2000 और 2014 के विधानसभा चुनाव शामिल हैं।

अब उनके बेटे ताहिर हुसैन ने INLD के संगठन में जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में परिवार की अगली पीढ़ी भी क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

ताहिर को INLD की स्थानीय संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी भूमिका बढ़ी है। हाल में नूंह में INLD के सम्मान दिवस कार्यक्रम के बाद भी उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा हुई।

एक छत के नीचे दो दलों की राजनीति का सवाल

पिता और बेटे की अलग-अलग राजनीतिक भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं होती हैं। खासतौर पर तब जब किसी परिवार के सदस्य अलग-अलग पार्टियों के संगठन में जिम्मेदारी संभालते हों।

INLD के कार्यक्रम में ताहिर हुसैन पार्टी संगठन के नेता के तौर पर नजर आते हैं, जबकि जाकिर हुसैन बीजेपी से जुड़े कार्यक्रमों में अपनी राजनीतिक भूमिका निभाते हैं। इससे नूंह की राजनीति में परिवार की मौजूदगी को लेकर चर्चा बनी रहती है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राजनीतिक दल अलग-अलग संगठन और विचारधारा के आधार पर काम करते हैं। इसलिए परिवार के सदस्यों की निजी रिश्तेदारी को सीधे राजनीतिक गठजोड़ का संकेत मानना उचित नहीं होगा।

कांग्रेस ने साधा निशाना

इस राजनीतिक स्थिति को लेकर कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने भी निशाना साधा है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बीजेपी और INLD के बीच कथित राजनीतिक तालमेल का आरोप लगाया और INLD की भूमिका पर सवाल उठाए।

ये आरोप कांग्रेस नेता की राजनीतिक टिप्पणी हैं। बीजेपी और INLD की वास्तविक रणनीति या आपसी संबंधों का आकलन करने के लिए दोनों दलों के आधिकारिक बयानों और चुनावी गतिविधियों को देखना जरूरी होगा।

नूंह में मुकाबला रहा है बहुकोणीय

नूंह जिले में विधानसभा राजनीति लंबे समय से कई दलों के बीच मुकाबले का क्षेत्र रही है। 2024 में नूंह सीट पर कांग्रेस, बीजेपी और INLD समेत कई दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

ऐसे राजनीतिक माहौल में ताहिर हुसैन का INLD में संगठनात्मक पद संभालना और जाकिर हुसैन का बीजेपी के साथ रहना परिवार को स्थानीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रखता है।

फिलहाल सबसे खास बात यही है कि एक ही परिवार में पिता और बेटे ने अलग-अलग राजनीतिक रास्ते चुने हैं। आने वाले समय में नूंह की स्थानीय राजनीति में इन दोनों नेताओं की गतिविधियां किस तरह आगे बढ़ती हैं, इस पर क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों की नजर रहेगी।

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