AI के दौर में जिम्मेदार पत्रकारिता पर राष्ट्रीय संवाद, नई दिल्ली में संपन्न हुआ डिजिटल जर्नलिज्म कॉन्क्लेव

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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026:

तेजी से बदलते डिजिटल मीडिया परिदृश्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मीडिया नैतिकता, कानून, तकनीकी नवाचार और सेल्फ-रेगुलेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित स्वामी विवेकानंद डिजिटल जर्नलिज्म कॉन्क्लेव एवं नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

रामकृष्ण परमहंस फाउंडेशन (RPF) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में आध्यात्मिकता, पत्रकारिता, कूटनीति, सार्वजनिक प्रशासन, कानून, तकनीक, सार्वजनिक नीति और नागरिक समाज से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोगों ने भाग लिया। कॉन्क्लेव की केंद्रीय थीम थी— “Building a Responsible, Ethical & Future-Ready Digital Media Ecosystem through Law, Technology, Innovation & Self-Regulation.”

AI के दौर में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां

कॉन्क्लेव में डिजिटल पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर विशेष चर्चा हुई। AI आधारित कंटेंट निर्माण, ऑटोमेशन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, गलत सूचना, बदलते दर्शक व्यवहार और नए डिजिटल बिजनेस मॉडल पत्रकारिता के पारंपरिक तौर-तरीकों को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं।

वक्ताओं के विचार-विमर्श से यह बात प्रमुखता से सामने आई कि तकनीक पत्रकारिता के उपकरणों को बदल सकती है, लेकिन विश्वसनीयता की बुनियाद सत्य, नैतिकता और जिम्मेदारी ही रहेगी। इसलिए डिजिटल मीडिया संस्थानों के सामने चुनौती केवल नई तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि उसका जिम्मेदार और पारदर्शी इस्तेमाल सुनिश्चित करने की भी है।

स्वामी आत्मप्रियानंद ने जोड़ा विज्ञान, आध्यात्मिकता और तकनीक का आयाम

कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण स्वामी आत्मप्रियानंद जी महाराज, प्रो-चांसलर, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (RKMVERI) की उपस्थिति और संबोधन रहा।

विज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन के बीच संवाद को सामने रखते हुए स्वामी आत्मप्रियानंद जी ने तेजी से विकसित हो रही मानव ज्ञान की दुनिया पर विचार रखा। उनके संबोधन में बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम साइंस जैसी उभरती तकनीकों का भी संदर्भ आया।

कॉन्क्लेव में यह विचार भी सामने आया कि तकनीकी क्षमता अपने आप में मानवता के सामने मौजूद सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकती। AI और डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ विवेक, चरित्र, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

रामकृष्ण-विवेकानंद परंपरा के ज्ञान, चरित्र और सेवा जैसे मूल्यों को डिजिटल युग की चुनौतियों से जोड़ते हुए यह विमर्श सामने आया कि विज्ञान और आध्यात्मिकता को परस्पर विरोध के रूप में देखने के बजाय मानव विकास के व्यापक संदर्भ में समझा जा सकता है।

अखिलेश मिश्रा ने रखा कूटनीति और जिम्मेदार संचार का वैश्विक दृष्टिकोण

कॉन्क्लेव में श्री अखिलेश मिश्रा, IFS (सेवानिवृत्त), पूर्व राजदूत और पूर्व महानिदेशक, इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) ने भी अपने विचार रखे।

कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने संचार, विश्वसनीयता, संस्कृति और भारत की वैश्विक छवि के व्यापक संदर्भ को सामने रखा।

डिजिटल युग में समाचार और सूचनाएं कुछ ही सेकंड में भौगोलिक सीमाओं को पार कर जाती हैं। ऐसे में पत्रकारिता की जिम्मेदारी केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सटीकता, संदर्भ, सांस्कृतिक समझ और विश्वसनीयता भी सार्वजनिक संवाद के महत्वपूर्ण हिस्से बन जाते हैं।

डिजिटल सूचना व्यवस्था में जिम्मेदारी और कानून पर चर्चा

श्री के.पी. वेंकटेश्वरा राव, IPS, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, मध्य प्रदेश पुलिस ने डिजिटल सूचना तंत्र और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण को चर्चा में शामिल किया।

सोशल मीडिया और डिजिटल पब्लिशिंग ने संचार को व्यापक और लोकतांत्रिक बनाया है, लेकिन इसके साथ गलत सूचना, साइबर दुरुपयोग, तेजी से सूचना प्रसार और सार्वजनिक जिम्मेदारी जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं।

कॉन्क्लेव में डिजिटल पत्रकारों और प्रकाशकों के लिए फैक्ट वेरिफिकेशन, सटीकता, नैतिक आचरण और लागू कानूनों की समझ को महत्वपूर्ण बताया गया।

जमीनी भारत और डिजिटल मीडिया की भूमिका

कॉन्क्लेव में श्री विजय सिंह बैंसला, अध्यक्ष, गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने भी अपने विचार रखे और चर्चा को जमीनी सामाजिक नेतृत्व एवं नागरिक भागीदारी से जोड़ा।

भारत के डिजिटल विस्तार ने छोटे शहरों, गांवों और विभिन्न समुदायों को अपनी आवाज सार्वजनिक मंचों तक पहुंचाने के नए अवसर दिए हैं। ऐसे में डिजिटल पत्रकारिता के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि स्थानीय मुद्दों और समुदायों की आवाज को पर्याप्त संदर्भ, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए।

इस विमर्श ने यह रेखांकित किया कि भारत में पत्रकारिता का भविष्य केवल तकनीकी विकास से तय नहीं होगा, बल्कि इस बात से भी जुड़ा होगा कि डिजिटल मीडिया देश के विविध समुदायों और उनकी वास्तविकताओं को किस तरह प्रस्तुत करता है।

मीडिया एथिक्स और सेल्फ-रेगुलेशन पर जोर

कॉन्क्लेव में डिजिटल मीडिया के लिए सेल्फ-रेगुलेशन, नैतिक पत्रकारिता और जवाबदेही को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में देखा गया।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खबरों के तेजी से प्रसार के बीच गलत सूचना और अधूरी जानकारी के जोखिम बढ़े हैं। ऐसे माहौल में मीडिया संस्थानों के लिए आंतरिक संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच, पारदर्शिता और जिम्मेदार प्रकाशन प्रक्रियाओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना गया।

सम्मेलन का व्यापक संदेश यह रहा कि डिजिटल पत्रकारिता का भविष्य केवल अधिक तेज, अधिक स्वचालित या अधिक तकनीकी होने में नहीं, बल्कि अधिक विश्वसनीय, जिम्मेदार और नैतिक बनने में भी है।

स्वामी विवेकानंद नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 से प्रतिभाओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 भी प्रदान किए गए। इन पुरस्कारों के माध्यम से पत्रकारिता, संचार, जनसेवा, कानून, सार्वजनिक नीति, पेशेवर उत्कृष्टता तथा सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को सम्मानित किया गया।

इन पुरस्कारों की अवधारणा स्वामी विवेकानंद के चरित्र, सेवा, उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विचारों की भावना से प्रेरित रही।

‘Sri Sri Ramakrishna Kathamrita — As I Have Understood’ का लोकार्पण

कार्यक्रम में श्री अशिम कुमार मुखर्जी द्वारा लिखित पुस्तक “Sri Sri Ramakrishna Kathamrita — As I Have Understood” का भी लोकार्पण किया गया।

यह पुस्तक श्री रामकृष्ण परमहंस से जुड़े आध्यात्मिक संवादों और सार्वभौमिक शिक्षाओं को लेखक की समझ और चिंतन के माध्यम से समकालीन पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास है।

पुस्तक का लोकार्पण पत्रकारिता, विज्ञान, तकनीक और नैतिकता पर केंद्रित राष्ट्रीय संवाद के साथ हुआ, जिसने RPF की आध्यात्मिक प्रेरणा और उसके समकालीन ज्ञान एवं सार्वजनिक विमर्श से जुड़े कार्यों के बीच एक प्रतीकात्मक संबंध स्थापित किया।

डिजिटल पत्रकारिता के भविष्य के लिए एक व्यापक संवाद

कॉन्क्लेव के दौरान सामने आया विमर्श इस बात तक सीमित नहीं रहा कि AI पत्रकारिता को किस तरह बदलेगा। चर्चा ने इससे आगे बढ़कर यह सवाल उठाया कि तकनीकी परिवर्तन के बीच पत्रकारिता के मूल मूल्य कैसे कायम रखे जाएं।

AI, बिग डेटा, ऑटोमेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म आने वाले समय में समाचार निर्माण और वितरण को और बदल सकते हैं। लेकिन सत्य, विश्वसनीयता, मानवीय संवेदना, नैतिकता और जिम्मेदारी जैसे तत्व पत्रकारिता के मूल आधार बने रहेंगे।

रामकृष्ण परमहंस फाउंडेशन के अनुसार, कॉन्क्लेव का उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों और आधुनिक ज्ञान के बीच संवाद स्थापित करते हुए AI, डिजिटल पत्रकारिता, कानून, तकनीक, शासन और संचार के भविष्य जैसे समकालीन मुद्दों पर राष्ट्रीय विमर्श के लिए मंच तैयार करना था।

30 सितंबर 2026 को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित यह सम्मेलन डिजिटल मीडिया के बदलते दौर में पत्रकारिता के सामने मौजूद तकनीकी अवसरों और नैतिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संवाद के रूप में संपन्न हुआ।

 

कार्यक्रम: स्वामी विवेकानंद डिजिटल जर्नलिज्म कॉन्क्लेव एवं नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026
आयोजक: रामकृष्ण परमहंस फाउंडेशन (RPF)
स्थान: कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली
तारीख: 30 सितंबर 2026
थीम: Building a Responsible, Ethical & Future-Ready Digital Media Ecosystem through Law, Technology, Innovation & Self-Regulation

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