चंडीगढ़/गुरुग्राम, 03 अक्टूबर 2026 । हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर सख्त संदेश दिया है। गुरुग्राम में विकास कार्यों, नागरिक सुविधाओं और जनसमस्याओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि किसी शिकायत पर केवल निस्तारण रिपोर्ट लगा देना या फाइल बंद कर देना पर्याप्त नहीं है। जब तक शिकायतकर्ता खुद यह पुष्टि नहीं करता कि उसकी समस्या का समाधान हो गया है, तब तक मामले को पूरी तरह निस्तारित नहीं माना जाना चाहिए।
क्यों सीएम सैनी ने दी चेतावनी
इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से एक ऐसी समस्या को लेकर जवाब तलब किया, जिसके समाधान की रिपोर्ट पहले ही उनकी टेबल पर पहुंच चुकी थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री ने सामने मौजूद वास्तविक स्थिति से उस रिपोर्ट का मिलान किया तो तस्वीर कुछ और ही निकली। समस्या जस की तस बनी हुई थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस पर कड़े तेवर दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हरियाणा में जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा और नागरिकों की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
नायब सैनी ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं और जनसमस्याओं से जुड़े मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। सरकार शिकायतों की निगरानी के लिए समानांतर व्यवस्था के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वास्तव में नागरिकों को राहत मिली या नहीं।
CM खुद भी कर चुके हैं शिकायतकर्ताओं से बात
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ मामलों में उन्होंने स्वयं शिकायतकर्ताओं से बात करके उनकी समस्या की स्थिति समझी और इसके बाद संबंधित अधिकारियों के सामने मामला उठाया। इससे सरकार की शिकायत निवारण व्यवस्था में फीडबैक और जमीनी स्थिति की जांच पर जोर दिखाई देता है।
पहले भी अधिकारियों को दे चुके हैं निर्देश
हरियाणा सरकार की ओर से मई 2026 में भी CM Window की शिकायतों के समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए गए थे। उस समय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा करने, एक्शन टेकन रिपोर्ट समय पर अपलोड करने और जरूरत पड़ने पर शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में मामलों का समाधान करने को कहा था।
फाइल बंद करना नहीं, समस्या का समाधान जरूरी
मुख्यमंत्री के ताजा निर्देश का मुख्य संदेश यही है कि सरकारी रिकॉर्ड में किसी शिकायत का निस्तारण दर्ज होना अंतिम कदम नहीं माना जाएगा। शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलना और उसकी ओर से समाधान की पुष्टि होना भी प्रक्रिया का हिस्सा होगा। इससे अधिकारियों की जवाबदेही को शिकायत के वास्तविक परिणाम से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।