हरिद्वार, 25 सितंबर 2026 । उत्तराखंड के हरिद्वार में बिना जरूरी मान्यता के संचालित मदरसों को लेकर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने ऐसे संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक रजिस्ट्रेशन और मान्यता की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। तय अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित मदरसों को सील करने की चेतावनी दी गई है। यह कार्रवाई मदरसों के निरीक्षण के दौरान सामने आई व्यवस्थागत और मान्यता संबंधी कमियों के बाद तेज हुई है।
क्या है मामला?
उत्तराखंड में मदरसों पर एक बार फिर कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है। हरिद्वार के तीन मदरसों को प्राधिकरण की ओर से एक सप्ताह में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कराने की मोहलत दी गई है। समय सीमा के भीतर कागजी कार्रवाई पूरी न होने की स्थिति में मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। दरअसल, मदरसों का औचक निरीक्षण किया गया। इसमें कई प्रकार की गड़बड़ी की बात सामने आई। बिना प्राधिकरण की अनुमति के मदरसों के निर्माण की बात सामने आई है।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बहादराबाद ब्लॉक के मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थानों की मान्यता, संचालन व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, निरीक्षण में कुछ संस्थानों के पास शिक्षा विभाग की मान्यता तो मिली, लेकिन अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से आवश्यक मान्यता नहीं ली गई थी। ऐसे संस्थानों को वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक सप्ताह में रजिस्ट्रेशन पूरा करने का निर्देश
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जिन मदरसों के पास आवश्यक रजिस्ट्रेशन या मान्यता नहीं है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हरिद्वार में निरीक्षण किए गए संस्थानों को एक सप्ताह का समय दिया गया है।
प्राधिकरण के मुताबिक, समय सीमा में आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ सील करने की कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच आगे भी जारी रहेगी।
452 मदरसों की जांच का मामला
उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता और संचालन व्यवस्था को लेकर व्यापक स्तर पर जांच चल रही है। सितंबर में सामने आई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में चिन्हित 452 मदरसों में से 200 ने मान्यता के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कराया था, जबकि 34 को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान के रूप में प्रमाण पत्र दिए जा चुके थे।
प्राधिकरण ने यह भी बताया था कि 89 मदरसों के पंजीकरण का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। इनके खिलाफ शासन को बंद करने की सिफारिश की गई है।
बिना मान्यता संचालित मदरसों के खिलाफ उत्तराखंड में पहले भी कार्रवाई हुई है। सितंबर की शुरुआत में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार 17 मदरसों को सील किया जा चुका था। इनमें ऊधमसिंह नगर के आठ, हरिद्वार और नैनीताल के चार-चार तथा देहरादून का एक मदरसा शामिल था।
ऊधमसिंह नगर में भी प्रशासन ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों पर कार्रवाई की थी। कुछ संचालकों ने दावा किया था कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन और शुल्क जमा कर दिया था, जबकि प्रशासन की ओर से कहा गया कि संबंधित संस्थानों के पास मान्यता के प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
प्राधिकरण की ओर से कहा गया है कि धार्मिक शिक्षा देने पर रोक का मुद्दा नहीं है, लेकिन संस्थानों में मुख्यधारा की शिक्षा की व्यवस्था भी जरूरी है। अधिकारियों के अनुसार मान्यता प्राप्त संस्थानों में विद्यार्थियों की शिक्षा को व्यवस्थित करने और उन्हें औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इस पर भी नजर
प्राधिकरण ने बंद हो चुके संस्थानों के विद्यार्थियों को दूसरे मान्यता प्राप्त विद्यालयों या मदरसों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी भी ली है। इसका उद्देश्य कार्रवाई के बीच विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न होने देना है।
वहीं, प्राधिकरण के अनुसार कक्षा एक से आठ तक पढ़ाई कराने वाले मान्यता प्राप्त मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को पीएम पोषण योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी जांच के बाद शुरू की जा सकती है।
मौजूदा कार्रवाई से साफ है कि उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता और पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक जांच तेज है। जिन संस्थानों ने अभी तक जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनके सामने दस्तावेज और मान्यता संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने की चुनौती है। वहीं, जिन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, उनके संचालकों की ओर से भी कुछ मामलों में प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों के रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।