बादल परिवार के करीबी मेजर भूपिंदर ढिल्लों ने थामा BJP का दामन

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चंडीगढ़, 16 सितंबर 2026। पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल और राजनीतिक समीकरणों को लेकर हलचल बढ़ रही है। इसी बीच दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई और लंबे समय तक उनके राजनीतिक सहयोगी रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों (रिटायर्ड) भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। उनके साथ उनके बेटे अमरवीर सिंह बादल ने भी BJP का दामन थामा है।

मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का बादल परिवार और शिरोमणि अकाली दल से पुराना रिश्ता रहा है। यही वजह है कि उनके BJP में जाने को पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

पंजाब में बादल सरनेम है बड़ा

सैनी ने सेना के रिटायर्ड अधिकारी का पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि इस कदम से पंजाब की आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी अहमियत को फिर से हासिल करने के बीजेपी के मिशन को काफी मजबूती मिलेगी। सैनी ने कहा कि मैं मेजर भूपिंदर सिंह जी बादल का आभार व्यक्त करता हूं और उनका स्वागत करता हूं, जो प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई हैं। उन्होंने पंजाब को मजबूत बनाने का संकल्प लिया है। पंजाब जो कभी हमारा नंबर वन राज्य हुआ करता था। उसे फिर से नंबर वन राज्य बनाने के लिए मेजर भूपिंदर सिंह जी बादल ने तय किया है कि हमें भारतीय जनता पार्टी को मज़बूत करना होगा। इस इलाके के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सीएम सैनी ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी मजबूत होगी, तो पंजाब भी तेजी से आगे बढ़ेगा और एक विकसित पंजाब बनेगा।

कौन हैं मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों?

मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों 78 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी हैं। उन्होंने सेना से 1983 में रिटायरमेंट लिया था। इसके बाद वह कृषि, सामाजिक कार्य और राजनीति से जुड़े रहे। वह प्रकाश सिंह बादल के बेहद करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल रहे और लंबे समय तक पर्दे के पीछे संगठनात्मक और चुनावी रणनीति में भूमिका निभाते रहे।

रिपोर्टों के मुताबिक, ढिल्लों 1997 से 2002 के बीच प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सचिव रहे। इस दौरान पंजाब में अकाली दल-BJP गठबंधन की सरकार थी। उन्होंने संगठन के भीतर समन्वय और चुनावी गतिविधियों से जुड़े कई काम संभाले।

बादल परिवार से क्या रिश्ता है?

मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई थे। उनके पिता गुर राज सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल के पिता के छोटे भाई थे। गुर राज सिंह बादल शुरुआती दौर में अकाली राजनीति से जुड़े रहे और 1952 से 1956 तक राज्यसभा सांसद भी रहे।

इस पारिवारिक संबंध के कारण ढिल्लों का बादल परिवार से रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक भी रहा है। यही वजह है कि उनका BJP में शामिल होना पंजाब की सियासत में खास चर्चा का विषय बना है।

प्रकाश सिंह बादल की राजनीतिक विरासत क्यों महत्वपूर्ण?

प्रकाश सिंह बादल पंजाब की राजनीति के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में रहे। उन्होंने अलग-अलग कार्यकालों में पांच बार मुख्यमंत्री पद संभाला। शिरोमणि अकाली दल की राजनीति में उनकी केंद्रीय भूमिका रही और अकाली दल-BJP गठबंधन के दौर में भी वह प्रमुख चेहरा थे।

उनके परिवार का पंजाब की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके बेटे सुखबीर सिंह बादल वर्तमान में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष हैं। ऐसे में बादल परिवार से जुड़े किसी पुराने राजनीतिक सहयोगी का दूसरी राष्ट्रीय पार्टी में जाना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा को जन्म देता है।

2027 चुनाव से पहले बदल रहे समीकरण

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अभी से संगठनात्मक तैयारियों में जुटे हैं। BJP भी राज्य में अपना आधार मजबूत करने पर जोर दे रही है। वहीं अकाली दल अपने पारंपरिक राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

ऐसे माहौल में मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों और उनके बेटे का BJP में जाना चुनाव से पहले दलों की रणनीति और संभावित गठबंधन समीकरणों पर चर्चा को बढ़ा सकता है। हालांकि, इससे भविष्य के चुनावी गठबंधन या सीटों के बंटवारे को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।

ढिल्लों ने BJP में जाने पर क्या कहा?

रिपोर्टों के अनुसार, मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने BJP में जाने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और उनके दृष्टिकोण को एक कारण बताया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि राजनीतिक रास्ता अलग होने के बावजूद बादल परिवार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध बने रहेंगे।

यानी उनके बयान के मुताबिक BJP में शामिल होना उनके लिए राजनीतिक निर्णय है, जबकि बादल परिवार के साथ पारिवारिक संबंध अलग बने रहेंगे।

पंजाब की राजनीति में अब आगे क्या?

मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों की BJP में एंट्री को पंजाब में 2027 से पहले हो रही राजनीतिक गतिविधियों की एक कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। इसका असर अकाली दल और BJP के बीच भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले महीनों में दोनों दलों के फैसलों और औपचारिक बयानों से स्पष्ट होगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बादल परिवार से जुड़े एक पुराने और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे ने BJP का रुख किया है। इसके साथ ही उनके बेटे का भी BJP में शामिल होना इस घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में पंजाब में BJP, अकाली दल और अन्य दल अपने संगठन और गठबंधन की रणनीति किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

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