नई दिल्ली, 16 सितंबर 2026। प्राइवेट नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए PF यानी Provident Fund सैलरी का अहम हिस्सा होता है। हर महीने वेतन से PF की रकम कटती है और उतना ही नहीं, बल्कि नियोक्ता भी इसमें अपना योगदान देता है। हालांकि PF कटौती को लेकर अक्सर यह सवाल सामने आता है कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹25 हजार या उससे कम है तो क्या PF कटना अनिवार्य है?
इस मामले में सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि PF की पात्रता केवल कर्मचारी की कुल इन-हैंड सैलरी देखकर तय नहीं होती। EPF कानून के तहत आने वाले प्रतिष्ठान और कर्मचारी की स्थिति के आधार पर नियम लागू होते हैं। EPFO आधिकारिक तौर पर EPF Scheme, EPS और EDLI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन करता है।
यह लिमिट सैलरी और DA पर लागू होती है, पूरी CTC या ग्रॉस सैलरी पर नहीं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार के इस फैसले 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का फायदा मिलेगा। अभी देश में 7.89 करोड़ लोग पीएफ के दायरे में आते हैं।
इससे पहले 2014 में पीएफ के लिए बेसिक सैलरी की लिमिट ₹6500 से बढ़ाकर ₹15 हजार की गई थी।
PF के लिए ₹25 हजार की सीमा को समझना जरूरी
₹25 हजार की बेसिक सैलरी को PF की कोई सार्वभौमिक नई अनिवार्य सीमा मानना सही नहीं होगा। PF के नियमों में वेज सीलिंग और सदस्यता की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹25 हजार होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर परिस्थिति में PF उसी तरीके से कटेगा।
कर्मचारी और नियोक्ता के लिए PF योगदान की गणना निर्धारित EPF नियमों के अनुसार होती है। इसलिए वेतन स्लिप में Basic, DA और अन्य वेतन घटकों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
कर्मचारी की सैलरी से कितना PF कटता है?
EPF के सामान्य प्रावधानों में कर्मचारी का योगदान आम तौर पर PF वेतन का 12 प्रतिशत होता है। नियोक्ता भी निर्धारित आधार पर योगदान करता है। नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPF में और निर्धारित हिस्सा EPS यानी पेंशन योजना में जा सकता है।
इस वजह से अगर किसी कर्मचारी की वेतन संरचना में PF योग्य वेतन ₹15,000 माना जा रहा है, तो कर्मचारी का 12 प्रतिशत योगदान ₹1,800 प्रति माह होगा। वास्तविक कटौती कर्मचारी की पात्रता, वेतन संरचना और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
₹25 हजार बेसिक वालों के लिए क्या समझें?
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹25,000 है, तो केवल इस आंकड़े के आधार पर PF को लेकर फैसला नहीं किया जा सकता। यह देखना होगा कि कर्मचारी EPF के दायरे में कैसे आता है, उसकी सदस्यता की स्थिति क्या है और कंपनी किस वेतन आधार पर योगदान जमा कर रही है।
कई कंपनियां निर्धारित सीमा से अधिक वेतन पर भी PF योगदान जारी रखती हैं। वहीं कुछ मामलों में PF की गणना निर्धारित वेतन सीमा तक सीमित हो सकती है। इसलिए कर्मचारी को अपनी नियुक्ति की शर्तों और वेतन स्लिप को देखना चाहिए।
PF कटने से कर्मचारी को क्या फायदा?
PF सिर्फ हर महीने सैलरी से कटने वाली रकम नहीं है। यह कर्मचारी की लंबी अवधि की बचत और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था है। EPFO के तहत EPF के साथ पेंशन और बीमा से संबंधित योजनाएं भी संचालित होती हैं।
नौकरी के दौरान जमा होने वाली रकम पर ब्याज मिलता है और निर्धारित परिस्थितियों में कर्मचारी PF से आंशिक निकासी भी कर सकता है। रिटायरमेंट के समय यह रकम आर्थिक सुरक्षा देने में मदद कर सकती है।