पंचकूला, 03 सितंबर2026 । हरियाणा के बहुचर्चित IDFC First Bank फंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। पंचकूला की विशेष CBI अदालत में दाखिल इस चार्जशीट में कुल 19 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें हरियाणा कैडर के 6 IAS अधिकारी, IDFC First Bank के 3 अधिकारी, AU Small Finance Bank का एक अधिकारी और हरियाणा सरकार से जुड़े 9 अन्य अधिकारी शामिल हैं।
नई चार्जशीट में कई बड़े नाम
सीबीआई की नई चार्जशीट में बड़े नाम शामिल हैं। इसमें हरियाणा कैडर के 6 आईएएस अधिकारी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का 1 अधिकारी और हरियाणा राज्य सरकार के 9 अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करने, जालसाजी, नकली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने, खातों में हेरफेर, आपराधिक विश्वासघात, बीएनएस के तहत अपराध के लिए उकसाने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
₹504 करोड़ की सरकारी राशि में कथित हेराफेरी
यह मामला हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों और संस्थाओं की करीब ₹504 करोड़ की सरकारी राशि की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। CBI के मुताबिक जांच में सरकारी अधिकारियों और बैंक अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत का पता चला है। आरोप है कि सरकारी फंड को अधिकृत बैंकों से हटाकर IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की कुछ विशेष शाखाओं में ट्रांसफर कराया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि इसके लिए संबंधित शाखाओं में बैंक खाते खोले गए और सरकारी वित्तीय अनुशासन तथा धोखाधड़ी रोकने से जुड़े नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन किया गया। इसके बाद रकम ऐसे तीसरे पक्षों के बैंक खातों में पहुंचाई गई, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई सीधा संबंध नहीं था।
कई खातों में घुमाकर रकम को नकदी में बदलने का आरोप
CBI की जांच के अनुसार सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे किसी एक खाते में रखने के बजाय कई बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि रकम को अलग-अलग स्तरों पर घुमाने के बाद उसे नकदी में बदला गया और इससे जुड़े लोगों ने कथित तौर पर आर्थिक लाभ हासिल किया। इस तरह की लेनदेन श्रृंखला से रकम की वास्तविक दिशा और लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
आठ विभाग और संस्थाएं जांच के दायरे में
कथित वित्तीय घोटाले का असर हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संस्थाओं के फंड पर पड़ा। इनमें पंचायती राज विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड समेत अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
CBI इससे पहले इस मामले में 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियां शामिल हैं। तीसरी चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले में अब तक कुल 37 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। जांच एजेंसी के अनुसार अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
54 जगहों पर छापेमारी, करीब ₹20 करोड़ का सोना जब्त
CBI ने जांच के दौरान कई स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया है। एजेंसी के मुताबिक अब तक 54 स्थानों पर तलाशी ली गई और करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की गई है। जांच अभी जारी है और एजेंसी अन्य संदिग्धों तथा आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
इस मामले में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं। CBI की जांच का अगला फोकस कथित तौर पर सरकारी धन की पूरी मनी ट्रेल, रकम के अंतिम लाभार्थियों और इस कथित वित्तीय नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है। तीसरी चार्जशीट के बाद यह मामला हरियाणा में सरकारी धन की निगरानी, बैंकिंग प्रक्रियाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।