ब्रजेश पाठक का अखिलेश यादव पर तीखा हमला: ‘ब्राह्मणों के नाम पर राजनीति नहीं चलेगी
लखनऊ, 07 अगस्त 2026 । उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए परिवारवाद और ब्राह्मण राजनीति को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण इन्हें गद्दी दिलाएं और ये अपने परिवार की खड़ाऊं रखकर राज करेंगे”, यह सोच लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा को सिर्फ ब्राह्मण वोटों के लिए जनेश्वर मिश्रा की याद आती है। डिप्टी सीएम ने X अकाउंट पर लिखा है- ‘यही आज की सपा है। इन्हें ब्राह्मण वोट के लिए जनेश्वर मिश्रा याद आते हैं और राज करने के लिए सिर्फ अपना परिवार। ब्राह्मण वोट दे, इन्हें गद्दी दिलाएं और ये उस पर अपने परिवार की खड़ाऊं रखकर राज करेंगे। अच्छा होता कि जनेश्वरजी की जयंती का सदुपयोग उनके व्यक्तित्व और उनके समाजवादी विचार से अवगत कराने के लिए किया गया होता लेकिन पूज्य जनेश्वरजी के बारे बताने से ज्यादा मुझे कोसा गया और दुनिया को ज्ञान का प्रकाश देने वाले ब्राह्मणों को याचकों की भांति अपमानित किया गया।
ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा परिवार केंद्रित राजनीति करती रही है और पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया कुछ सीमित लोगों तक ही सिमटी रहती है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति पर काम करती है, जबकि विपक्ष जातीय समीकरणों और परिवारवाद के सहारे राजनीति करने की कोशिश करता है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब विकास, सुशासन और पारदर्शिता के मुद्दों पर वोट करती है। उनके अनुसार, प्रदेश में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और निवेश जैसे क्षेत्रों में हुए कार्यों के आधार पर जनता सरकार का मूल्यांकन कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है।
वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से भाजपा के आरोपों का जवाब दिए जाने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होती है, जिसमें विभिन्न दल अपने-अपने समर्थक वर्गों को साधने का प्रयास करते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक, पिछड़ा वर्ग, दलित और अन्य सामाजिक समूह लंबे समय से चुनावी समीकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में प्रमुख नेताओं के बयान राजनीतिक चर्चा को और तेज कर देते हैं। हालांकि, किसी भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अंतिम फैसला जनता चुनाव के दौरान अपने मत के जरिए करती है।