नई दिल्ली, कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। अस्मिता और हर्ष ने महज 15 मिनट के अंतराल में अपने-अपने मुकाबले जीतकर भारत की झोली में दो स्वर्ण पदक डाल दिए। दोनों खिलाड़ियों ने बेहतरीन तकनीक, आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात दी और पोडियम के शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया।
देश के स्टार जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने 85.83 मीटर थ्रो किया। भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता। श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया।
एथलेटिक्स में तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन इवेंट में ब्रॉन्ज जीतकर इतिहास रचा। वह कॉमनवेल्थ में इस इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। ग्लासगो में चल रहे गेम्स के आठवें दिन भारत ने कुल 6 मेडल जीते। इनमें 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल रहे।
भारत ने गेम्स में अब तक 5 गोल्ड, 12 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज समेत 23 मेडल जीते हैं और मेडल टैली में 10वें स्थान पर है।
अस्मिता ने अपने वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में प्रभावशाली जीत दर्ज की। उनकी गति, संतुलन और तकनीकी कौशल ने मुकाबले के दौरान विरोधी खिलाड़ी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इसके कुछ ही मिनट बाद हर्ष ने भी अपने वर्ग के फाइनल में दमदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया और भारत की सफलता को दोगुना कर दिया।
इन दोनों स्वर्ण पदकों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय जूडो की बढ़ती ताकत को एक बार फिर साबित किया है। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से भारतीय दल का मनोबल बढ़ा है और प्रतियोगिता के आगामी मुकाबलों के लिए टीम को नई ऊर्जा मिली है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बेहतर प्रदर्शन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और देश में जूडो को नई पहचान मिलेगी।
भारत के इन उभरते खिलाड़ियों की सफलता उनके कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। खेल प्रेमियों ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई है और उम्मीद व्यक्त की है कि भारतीय जूडो टीम भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इसी तरह शानदार प्रदर्शन करती रहेगी।