‘कम से कम ₹18,000 वेतन दो’—लखनऊ में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, न्यूनतम वेतन और नियमितीकरण की उठी मांग
लखनऊ, 29 जुलाई 2026 । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने एकत्र होकर सरकार और संबंधित विभागों से कम से कम ₹18,000 मासिक वेतन सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वर्तमान वेतन महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है, इसलिए न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी आवश्यक है।
जानिए संघ के प्रदेश महामंत्री ने क्या आरोप लगाए
संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि कॉरपोरेशन हटाए गए कर्मचारियों की बहाली 18000 रुपये न्यूनतम वेतन निर्धारण, कैशलेस उपचार, ईपीएफ घोटाले की जांच, बकाया वेतन भुगतान और श्रम कानूनों के अनुपालन जैसे मुद्दों पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। संघ नवगठित आउटसोर्स सेवा निगम में कर्मचारियों को शामिल किए जाने का भी विरोध कर रहा है।
बातचीत में नहीं बन पाई कोई सहमति
दिन में करीब 2 बजे संगठन पदाधिकारियों और कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक के बीच वार्ता हुई, लेकिन इसमें कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन जारी रखने की बात कही।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समय पर वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा लाभ, ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग उठाई। उनका कहना था कि कई आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और वेतन नहीं मिल रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने की अपील की। उनका कहना है कि न्यूनतम वेतन बढ़ाने के साथ-साथ सेवा शर्तों में सुधार, नौकरी की सुरक्षा और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है।
फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, वेतन वृद्धि या अन्य मांगों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में कर्मचारियों की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित फैसले पर टिकी हुई है।