नई दिल्ली, 25 जून् 2026 । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से करीब 87.6 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग ₹8 लाख करोड़ से अधिक) की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है। इस राशि का बड़ा हिस्सा ईरान के साथ चल रहे सैन्य अभियान और उससे जुड़े रक्षा खर्चों के लिए प्रस्तावित किया गया है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह रकम पिछले साल मंजूर किए गए करीब 1 ट्रिलियन डॉलर और अगले वित्तीय वर्ष के लिए मांगे गए 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट से अलग है। सरकार का कहना है कि यह पैसा युद्ध से जुड़े ऑपरेशन, सेना की तैयारी, हथियारों के भंडार को फिर से भरने और सीक्रेट रक्षा कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा।
वहीं, संसद में इस मांग का विरोध बढ़ रहा है। मंगलवार को सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ट्रम्प से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने को कहा। इससे पहले ऐसा ही प्रस्ताव लोअर हाउस भी पास कर चुकी है। चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया।
व्हाइट हाउस द्वारा भेजे गए इस विशेष बजट प्रस्ताव में लगभग 67 अरब डॉलर रक्षा विभाग (Pentagon) के लिए मांगे गए हैं। इनमें हथियारों की खरीद, गोला-बारूद की भरपाई, सैन्य अभियानों के संचालन, ड्रोन कार्यक्रमों और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं पर खर्च शामिल है, फंडिंग पैकेज में केवल रक्षा खर्च ही नहीं, बल्कि अमेरिकी किसानों के लिए 11.1 अरब डॉलर की सहायता, अफ्रीका में इबोला प्रकोप से निपटने के लिए धनराशि और कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी राजनीति में विवाद बढ़ गया है। कई सांसदों ने ईरान युद्ध पर बढ़ते खर्च और राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं। डेमोक्रेटिक और कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी इस अतिरिक्त फंडिंग का विरोध किया है।
अब यह प्रस्ताव कांग्रेस के दोनों सदनों में विचार के लिए जाएगा, जहां इसे मंजूरी मिलने या इसमें बदलाव होने पर अंतिम फैसला होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि को मंजूरी दिलाना ट्रम्प प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।