सोना आयात पर सरकार की सख्ती, DGFT ने तय की नई लिमिट और जांच प्रक्रिया
नई दिल्ली, 15 मई 2026 । देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने सोने के आयातकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। देश में बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट और अवैध व्यापार पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने सोने के आयात को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए लिमिट और जांच संबंधी सख्त शर्तें लागू कर दी हैं। नए नियमों का असर ज्वेलरी कारोबार, ट्रेडर्स और गोल्ड इंपोर्ट से जुड़े व्यवसायों पर पड़ सकता है।
निर्यात का लक्ष्य पूरा करने पर ही मिलेगा अगला कोटा
अब सोना मंगाना केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने भविष्य के आयात को निर्यात प्रदर्शन से जोड़ दिया है। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी आयातक को अगला कोटा तभी जारी किया जाएगा जब उसने पिछले आयात पर तय निर्यात जिम्मेदारी (Export Obligation) का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया हो।
नई व्यवस्था के तहत अब सोना आयात करने वाली कंपनियों और एजेंसियों को पहले से अधिक दस्तावेज, वित्तीय विवरण और आयात के उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। DGFT ने कहा है कि केवल अधिकृत एजेंसियों और तय मानकों को पूरा करने वाले आयातकों को ही अनुमति मिलेगी। इसके अलावा संदिग्ध लेनदेन और असामान्य आयात पैटर्न की विशेष जांच भी की जाएगी।
सरकार का मानना है कि हाल के वर्षों में सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है। इसी को देखते हुए आयात प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार नए नियमों से गोल्ड स्मगलिंग और फर्जी बिलिंग जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कई कारोबारी संगठनों ने इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कुछ व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सख्त नियमों से वैध कारोबार प्रभावित हो सकता है, जबकि सरकार का दावा है कि यह कदम केवल पारदर्शिता और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई जांच प्रक्रिया के कारण आने वाले समय में गोल्ड इंपोर्ट की गति धीमी हो सकती है। हालांकि इससे सरकार को आयात पर बेहतर निगरानी रखने और टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी।
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में गोल्ड इंपोर्ट नीति में किसी भी बदलाव का असर सीधे घरेलू बाजार, ज्वेलरी कीमतों और निवेशकों की रणनीति पर देखने को मिल सकता है।