लेडी प्रिंसिपल को अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में मेयर पति पर शिकंजा, जांच तेज
लुधियाना , 15 मई 2026 । एक महिला प्रिंसिपल को कथित तौर पर अश्लील और आपत्तिजनक संदेश भेजने के मामले में मेयर के पति की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच तेज कर दी गई है। इस घटना ने राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
महिला आयोग की चेयरपर्सन ने पुलिस कमिश्नर को स्पष्ट किया है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच किसी सीनियर रैंक के अधिकारी से करवाई जाए। आयोग ने पुलिस को 20 दिनों का समय देते हुए रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जांच पूरी होने के बाद इसकी एक कॉपी शिकायतकर्ता महिला प्रिंसिपल को भी मुहैया करवाई जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
पीड़ित प्रिंसिपल ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार आपत्तिजनक मैसेज भेजे जा रहे थे, जिससे मानसिक उत्पीड़न और दबाव की स्थिति बन गई। शिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डिजिटल सबूतों और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संदेश किस नंबर और किन माध्यमों से भेजे गए। साथ ही संबंधित चैट, कॉल डिटेल और इलेक्ट्रॉनिक डाटा को भी खंगाला जा रहा है।
मामले के राजनीतिक रूप लेने के बाद विपक्षी दलों ने भी प्रशासन पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़िता को न्याय मिलना चाहिए।
वहीं आरोपी पक्ष की ओर से इन आरोपों को निराधार बताया जा रहा है। उनका कहना है कि राजनीतिक छवि खराब करने के उद्देश्य से साजिश के तहत मामला उछाला जा रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
गौरतलब है कि मेयर के पति पर लगे इन संगीन आरोपों के बाद से ही शहर के सियासी और सामाजिक हलकों में काफी चर्चा बनी हुई थी। अब महिला आयोग के सीधे दखल और सख्त रवैये के बाद पीड़ित महिला प्रिंसिपल को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि रवि आनंद के खिलाफ अगली कानूनी कार्रवाई क्या होगी
महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर समाज में लगातार चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ित पक्ष का भरोसा बना रहे और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।