ट्रंप का नया वैश्विक दांव! चीन से दोस्ती, ईरान पर सख्ती और दुनिया को चौंकाने वाली रणनीति

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वॉशिंगटन , 11 मई 2026 । अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक कूटनीतिक अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में चीन दौरे को मिली मंजूरी और ईरान को लेकर लगातार बढ़ती बयानबाज़ी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप की रणनीति को “दुश्मनी बनाम दोस्ती” का नया गेम कहा जा रहा है, जहां वे एक तरफ चीन के साथ संवाद के रास्ते खोलते दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी भी कर रहे हैं।

ट्रंप  3 दिन चीन की आधिकारिक यात्रा पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर ट्रंप यह यात्रा कर रहे हैं। करीब नौ वर्षों में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन की यह पहली यात्रा है। ट्रंप की यह यात्रा अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट और ताइवान समेत कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तवाव के दौरान हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप आगामी चुनावों से पहले खुद को एक मजबूत वैश्विक नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं। चीन के साथ रिश्तों में नरमी दिखाना अमेरिकी व्यापार और आर्थिक हितों के लिए अहम माना जा रहा है। लंबे समय से अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है और अब ट्रंप इस तनाव को अपने तरीके से नियंत्रित करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, यह दोस्ती पूरी तरह भरोसे की नहीं बल्कि रणनीतिक लाभ की राजनीति मानी जा रही है।

दूसरी ओर, ईरान को लेकर ट्रंप का रुख पहले की तरह बेहद सख्त नजर आ रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच अमेरिका की संभावित नई रणनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ कड़े आर्थिक और सैन्य दबाव की नीति को फिर से आगे बढ़ा सकते हैं। यही वजह है कि विश्लेषक इसे “दोस्त के साथ समझौता और दुश्मन पर दबाव” वाली रणनीति बता रहे हैं।

चीन दौरे की अनुमति को भी कई जानकार केवल कूटनीतिक यात्रा नहीं बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा मान रहे हैं। ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि वे दुनिया की बड़ी ताकतों के साथ सीधे संवाद करने में सक्षम हैं। वहीं, ईरान पर सख्ती दिखाकर वे अमेरिकी सुरक्षा और शक्ति की राजनीति को मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं, तो वैश्विक गठबंधनों और युद्धनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। रूस, चीन, ईरान और नाटो देशों के साथ संबंधों का नया समीकरण पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। ऐसे में ट्रंप का हर कदम अब केवल अमेरिकी राजनीति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि वह वैश्विक शक्ति संतुलन का हिस्सा बनता जा रहा है।

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