‘चंदा लो, धंधा दो’ नीति से प्राइवेट निवेश ठप: मोदी सरकार पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने गिनाए कारण

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नई दिल्ली, 05 मई 2026 । जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि “चंदा लो, धंधा दो” की कथित नीति के चलते देश में निजी निवेश (Private Investment) प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ा है और निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, पिछले कुछ समय से कांग्रेस अर्थव्यवस्था को उच्च वास्तविक जीडीपी विकास दर हासिल करने से रोकने वाली एक मूलभूत समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कर रही है। वह यह है कि निजी कॉर्पोरेट निवेश में सुस्ती है। उन्होंने कहा, कर दरों में कटौती की गई है और व्यापार की सुगमता में कथित तौर पर काफी सुधार हुआ है। लेकिन इन कदमों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिला यानी निजी निवेश में वृद्धि नहीं हुई।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मौजूदा आर्थिक स्थिति में सुस्ती के पीछे कई कारण हैं—नीतिगत अनिश्चितता, मांग में कमी और उद्योगों के लिए बढ़ती लागत। उनके अनुसार, जब तक पारदर्शिता और निष्पक्ष नीतियां लागू नहीं होंगी, तब तक निजी क्षेत्र खुलकर निवेश करने से हिचकेगा।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कहना है कि सरकार को निवेश बढ़ाने के लिए स्थिर और भरोसेमंद माहौल तैयार करना चाहिए। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) खासतौर पर दबाव में हैं, जिससे रोजगार सृजन पर भी असर पड़ रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा, अर्थव्यवस्था के निवेश-प्रधान क्षेत्रों पर बढ़ता नियंत्रण भी एक कारक है जिसे मोदी सरकार ने सुविधाजनक और प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, मोदानी इस भाईचारे का ज्वलंत उदाहरण हैं।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से कई बार यह कहा गया है कि देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं और बिजनेस ईज सुधार।

आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, निवेश का रुझान कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित होता है। ऐसे में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच वास्तविक स्थिति का आकलन आंकड़ों और दीर्घकालिक रुझानों के आधार पर ही किया जा सकता है।

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