नई दिल्ली , 21 मार्च 2026 ।आधुनिक युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और भारत भी अब पारंपरिक युद्ध के बजाय नई रणनीतियों पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के संघर्ष केवल सीमा पर आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि टेक्नोलॉजी, साइबर और स्पेस डोमेन में लड़े जाएंगे।
ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है।
भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है।
संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है।
भारत की रक्षा रणनीति में अब साइबर वॉरफेयर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे दुश्मन को बिना सीधे युद्ध के कमजोर करने की क्षमता विकसित की जा रही है।
भारतीय सशस्त्र बल आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस हो रहे हैं, जिनमें स्वदेशी ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और निगरानी उपकरण शामिल हैं। खासतौर पर बॉर्डर पर स्मार्ट सर्विलांस और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।
इस रणनीति का एक अहम हिस्सा हाइब्रिड वॉरफेयर है, जिसमें साइबर अटैक, सूचना युद्ध (Information Warfare), आर्थिक दबाव और सीमित सैन्य कार्रवाई का मिश्रण होता है। इससे दुश्मन पर दबाव बनाया जाता है, बिना बड़े पैमाने पर युद्ध छेड़े।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तैयारी का उद्देश्य केवल रक्षा नहीं, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही निष्प्रभावी करना है। यह रणनीति तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल के अनुरूप है, जहां तकनीकी बढ़त ही सबसे बड़ा हथियार बनती जा रही है।
कुल मिलाकर, भारत की यह तैयारी संकेत देती है कि आने वाले समय में युद्ध की परिभाषा बदल चुकी है—जहां जीत केवल मैदान में नहीं, बल्कि डेटा, तकनीक और रणनीति के स्तर पर तय होगी।