“भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार: बिहार में करप्ट पुलिसकर्मियों का होगा डिमोशन”

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पटना , 20 मार्च 2026 ।बिहार में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और पुलिस महकमे में जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लेते हुए डिमोशन (पदावनति) की नीति लागू करने की तैयारी की है।

बिहार में थाना स्तर पर भ्रष्ट आचरण वाले पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों पर अब सिर्फ निलंबन की कार्रवाई नहीं होगी। ऐसे पुलिस अफसरों-कर्मियों पर नकेल कसने के लिए उनको पदावनत (डिमोट) किया जाएगा। डिमोशन के बाद सामान्य जिम्मेदारी के साथ उनकी उसी थाने में तैनाती होगी, जिसमें पहले से पोस्टेड हैं। पुलिस मुख्यालय ने क्षेत्रीय पुलिस पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक में पुलिस मैनुअल के तहत कार्रवाई के अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने का निर्देश भी दिया है।

इस नई व्यवस्था के तहत दोषी पाए जाने पर इंस्पेक्टर को सब-इंस्पेक्टर (SI), और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) को जमादार जैसे निचले पदों पर भेजा जा सकता है। यह फैसला पुलिस विभाग में अनुशासन और ईमानदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सरकार का मानना है कि अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में केवल निलंबन या ट्रांसफर जैसे कदम उठाए जाते थे, जिनका असर सीमित रहता था। लेकिन पदावनति जैसी सख्त कार्रवाई से न केवल दोषियों पर सीधा असर पड़ेगा, बल्कि बाकी पुलिसकर्मियों के लिए भी यह एक कड़ा संदेश होगा।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस जांच और प्रमाण मिलने के बाद ही की जाएगी। विभागीय जांच प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश भी तैयार किए जा रहे हैं।

इस फैसले को पुलिस सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पुलिसिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता का भरोसा भी मजबूत होगा। हालांकि, कुछ लोग इसे सख्त कदम मानते हुए यह भी कह रहे हैं कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना जरूरी होगा, ताकि किसी निर्दोष को नुकसान न पहुंचे।

कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कठोर फैसले लेने से परहेज नहीं किया जाएगा।

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