‘बेंच हंटिंग’ पर सख्त हुआ दिल्ली हाई कोर्ट, जज से केस वापस लेने को बताया बेहद गंभीर मामला

0

नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 । Delhi High Court ने ‘बेंच हंटिंग’ को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी जज से मामला वापस लेने या सुनवाई बदलवाने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया के लिए बेहद गंभीर विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसी प्रवृत्तियों पर सख्ती जरूरी है।

‘बेंच हंटिंग’ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए, दिल्ली की एक अदालत ने एक वादी (केस दायर करने वाला शख्स को फटकार लगाई, जिसने न्यायिक पक्षपात का आरोप लगाकर अपने मामले को ट्रांसफर करने की कोशिश की थी। कानूनी तौर पर बेच हंटिंग का मतलब अपनी पसंद के जज या बेंच से अपने मामले की सुनवाई कराने की कोशिश करना है, ताकि अनुकूल फैसला मिल सके।

प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज संजय शर्मा-1 ने वादी संजीव तोमर के आवेदन को खारिज कर दिया। इसे अपमानजनक करार देते हुए न्यायपालिका पर गैरजरूरी आरोप लगाने के लिए अदालत ने तोमर पर 10,000 का जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने कहा कि कई बार पक्षकार अपने अनुकूल फैसला पाने की उम्मीद में अलग-अलग बेंच के सामने मामला ले जाने की कोशिश करते हैं, जिसे ‘बेंच हंटिंग’ कहा जाता है। न्यायालय के अनुसार यह प्रवृत्ति न्याय व्यवस्था की गरिमा और पारदर्शिता के खिलाफ है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी जज के सामने चल रहे मामले को केवल इसलिए वापस लेने की मांग करना कि फैसला अनुकूल नहीं हो सकता, न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए ऐसी कोशिशों को हतोत्साहित करना जरूरी है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक अदालत की यह टिप्पणी न्याय व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह संदेश जाता है कि अदालतें न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक हस्तक्षेप या दबाव को स्वीकार नहीं करेंगी।

इस टिप्पणी के बाद कानूनी हलकों में ‘बेंच हंटिंग’ जैसे मुद्दों पर नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अदालतों का सख्त रुख भविष्य में इस तरह की प्रवृत्तियों को रोकने में मदद कर सकता है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.