रायसीना डायलॉग में ईरानी उप-विदेश मंत्री का सख्त संदेश, बोले– आखिरी गोली तक लड़ेंगे

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नई दिल्ली, 06 मार्च 2026 । नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मंच Raisina Dialogue के दौरान ईरान के उप-विदेश मंत्री ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि उनका देश किसी भी आक्रामकता का डटकर मुकाबला करेगा और जरूरत पड़ने पर “आखिरी गोली तक लड़ने” के लिए तैयार है। उनके इस बयान ने सम्मेलन में मौजूद कूटनीतिक और रणनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

दिल्ली में चल रहे रायसीना डायलॉग 2026 में शुक्रवार को ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा- तेहरान के पास अमेरिकी-इजराइली हमले के खिलाफ देश की रक्षा के लिए बहादुरी से लड़ने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। हमने कसम खाई है कि देश आखिरी गोली और आखिरी सैनिक तक विरोध करेगा।

उन्होंने कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान में नेतृत्व बदलने की बात करते हैं, जबकि वे अपने ही देश में न्यूयॉर्क के मेयर तक नियुक्त नहीं कर सकते। यह एक तरह का औपनिवेशिक नजरिया है। वे अपने देश में लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को गिराना चाहते हैं।

न्यूज एजेंसी ANI से चर्चा के दौरान खतीबजादेह ने कहा- ईरान इस समय पूरी तरह से युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है। जब हम बात कर रहे हैं, मेरे साथी नागरिकों पर अमेरिका-इजराइल का लगातार हमला हो रहा है। मुझे लगता है कि अभी ईरान के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वह हमलावर के खिलाफ पूरी तरह से विरोध करे।

रायसीना डायलॉग में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, कूटनीतिज्ञ और सुरक्षा विशेषज्ञ वैश्विक सुरक्षा, भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर चर्चा करने के लिए एकत्र होते हैं। इसी मंच पर ईरानी प्रतिनिधि ने अपने देश की सुरक्षा नीति और क्षेत्रीय हालात पर खुलकर अपनी बात रखी।

ईरानी उप-विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद ईरान किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। उनके अनुसार यदि देश की सुरक्षा को चुनौती दी जाती है तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा।

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुरक्षा और स्थिरता का मुद्दा प्रमुख बना हुआ है। ऐसे में रायसीना डायलॉग जैसे मंच पर दिए गए इस बयान को क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े बयान वैश्विक कूटनीति में शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश का हिस्सा होते हैं। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें पश्चिम एशिया की स्थिति और उससे जुड़े कूटनीतिक प्रयासों पर बनी हुई हैं।

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