ट्रम्प की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ मीटिंग में भारत की भागीदारी: कूटनीतिक संकेत और रणनीतिक संदेश

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वॉशिंगटन, 20 फ़रवरी 2026 । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आयोजित बताई जा रही ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक में भारत की भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह बैठक वैश्विक शांति, क्षेत्रीय स्थिरता और सामरिक सहयोग जैसे मुद्दों पर केंद्रित बताई जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। यह बैठक वॉशिंगटन डीसी में हुई। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया।

भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा।

वहीं, 5 देशों ने युद्ध से तबाह फिलिस्तीनी इलाके में सैनिक तैनात करने पर सहमति दी है। वॉशिंगटन में हुई इस बैठक में करीब 50 देशों के अधिकारी शामिल हुए।

इनमें से 27 देश बोर्ड के सदस्य हैं, जिनमें अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, UAE, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ (EU) सहित बाकी देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल हुए।

भारत की भागीदारी का महत्व

भारत की उपस्थिति कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है:

  1. रणनीतिक संतुलन: भारत अमेरिका के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  2. इंडो-पैसिफिक फोकस: क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।

  3. वैश्विक छवि: शांति और स्थिरता से जुड़े मंचों में भागीदारी भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को मजबूत करती है।

राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बैठकों में भागीदारी केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह व्यापक कूटनीतिक संदेश भी देती है। भारत का रुख अक्सर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति पर आधारित रहा है, जहां वह विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ समान दूरी और सहयोग बनाए रखने की कोशिश करता है।

ट्रम्प की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ मीटिंग में भारत की भागीदारी को रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि भारत वैश्विक शांति और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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