नई दिल्ली, पाकिस्तान और अमेरिका के बीच आज होने वाली अहम बैठक/मुकाबले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दोनों देशों के रिश्ते दशकों पुराने हैं, लेकिन समय-समय पर इन संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अफगानिस्तान, आतंकवाद, रक्षा सहयोग, आर्थिक सहायता और चीन के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां—ये सभी मुद्दे इस टकराव की पृष्ठभूमि में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
टी-20 वर्ल्ड कप का 12वां मैच आज पाकिस्तान और अमेरिका के बीच कोलंबो के SSC स्टेडियम में खेला जाएगा। मुकाबला शाम 7 बजे शुरू होगा, जिसका टॉस 6.30 बजे होना है।
ग्रुप-ए में यह दोनों टीमों का दूसरा मैच रहेगा। पाकिस्तान ने नीदरलैंड के खिलाफ पहला मैच 20वें ओवर में जीता था। वहीं अमेरिका ने होम टीम भारत को चैलेंज देने के बाद 29 रन से करीबी मुकाबला गंवा दिया था।
वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को हरा चुका USA टी-20 क्रिकेट में दोनों टीमें एक ही बार भिड़ी हैं। 2024 के वर्ल्ड कप में दोनों ग्रैंड प्रैरी स्टेडियम में आमने-सामने हुई थीं। जहां पाकिस्तान से मिले 160 रन के टारगेट के सामने अमेरिका ने भी 159 रन बनाकर मैच टाई करा लिया था। फिर सुपर ओवर में इसे जीत भी लिया था। इसी मैच को जीतकर अमेरिका ने पाकिस्तान को बाहर किया और सुपर-8 स्टेज में एंट्री की थी।
रक्षा सहयोग पर भी चर्चा संभावित है। अमेरिका लंबे समय तक पाकिस्तान को सैन्य सहायता देता रहा है, लेकिन आतंकवाद और चीन के साथ सैन्य साझेदारी को लेकर अमेरिका ने कई बार चिंता जताई है। खासकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और बीजिंग के साथ बढ़ते सामरिक रिश्ते, अमेरिका की रणनीतिक नजर में अहम हैं।
आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक संस्थाओं से राहत की उम्मीद रहती है, जिन पर अमेरिका का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में यह बैठक पाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव सीधे सैन्य संघर्ष का संकेत नहीं है, बल्कि यह कूटनीतिक दबाव और रणनीतिक संतुलन की राजनीति है। यदि दोनों पक्ष समझदारी से आगे बढ़ते हैं तो सहयोग की नई संभावनाएं खुल सकती हैं, अन्यथा रिश्तों में और दूरी बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।
इस घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि दक्षिण एशिया की स्थिरता और वैश्विक शक्ति संतुलन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।