बजट 2026 – अब तक का सबसे बड़ा रक्षा बजट, सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता पर जोर

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नई दिल्ली, 02 फ़रवरी 2026 । बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन किए जाने की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी सैन्य तैयारियों, सीमाई सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। बदलते वैश्विक हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक युद्ध तकनीकों की जरूरत को देखते हुए सरकार ने रक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता दी है। यह बजट सिर्फ खर्च बढ़ाने का संकेत नहीं, बल्कि सैन्य ढांचे के व्यापक आधुनिकीकरण और घरेलू रक्षा उत्पादन को गति देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को 2026 का बजट पेश किया। संसद में 85 मिनट के भाषण में उन्होंने अब तक के सबसे बड़े रक्षा बजट, टैक्स फाइल में सहूलियत, रेलवे प्रोजेक्ट और 3 नए आयुर्वेदिक AIIMS जैसी बातें कहीं, लेकिन आम आदमी के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद के पहले बजट में देश का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.84 लाख करोड़ किया गया। यानी कुल डिफेंस बजट में 15.2% की बढ़ोतरी हुई। हथियार खरीदी, सेना के आधुनिकीकरण पर पिछले साल के ₹1.80 लाख करोड़ के मुकाबले ₹2.19 लाख करोड़ खर्चे जाएंगे। यह पूंजीगत खर्च में सीधे 22% की बढ़ोतरी है।

इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं। सीतारमण के भाषण में इन राज्यों पर सीधा असर डालने वाली बड़ी घोषणाएं नहीं रहीं, लेकिन तमिलनाडु-बंगाल को हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की सौगात मिली है।

सबसे अहम पहलू सैन्य आधुनिकीकरण (Modernization) है। थल सेना, वायु सेना और नौसेना—तीनों के लिए नई पीढ़ी के हथियार, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन तकनीक, निगरानी उपकरण और साइबर सुरक्षा ढांचे पर जोर दिया गया है। वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने, फाइटर जेट अपग्रेड, पनडुब्बी परियोजनाओं और सीमा निगरानी तकनीक में निवेश से भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी।

सीमा सुरक्षा पर भी बड़ा फोकस है। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर बुनियादी ढांचा, सड़कों, सुरंगों, एडवांस निगरानी सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट में निवेश बढ़ाया गया है। इससे सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर होगी। पर्वतीय और कठिन क्षेत्रों में संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष उपकरण और टेक्नोलॉजी शामिल की जा रही है।

रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में जाएगा। स्वदेशी रक्षा उद्योग, निजी कंपनियों की भागीदारी, स्टार्टअप्स और रक्षा अनुसंधान संस्थानों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। स्वदेशी मिसाइल, आर्टिलरी सिस्टम, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन निर्माण पर जोर से आयात निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे रोजगार, तकनीकी विकास और निर्यात क्षमता भी बढ़ेगी।

रक्षा अनुसंधान और तकनीक में निवेश बढ़ाना भी इस बजट की खासियत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर वॉरफेयर, स्पेस-आधारित निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्वायत्त हथियार प्रणालियों पर फोकस भारत को भविष्य के युद्ध परिदृश्य के लिए तैयार करेगा। DRDO और अन्य अनुसंधान एजेंसियों की परियोजनाओं को तेजी मिलने की उम्मीद है।

सैनिक कल्याण भी इस बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूर्व सैनिकों की पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवास और परिवार कल्याण योजनाओं के लिए भी प्रावधान बढ़ाए गए हैं। इससे रक्षा बलों का मनोबल मजबूत होता है, जो किसी भी सेना की असली ताकत होती है।

हालांकि, बड़ा रक्षा बजट हमेशा आर्थिक संतुलन पर बहस भी लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा जरूरतों और विकास प्राथमिकताओं के बीच संतुलन जरूरी है, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल में मजबूत रक्षा ढांचा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य हो गया है।

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