ममता बनर्जी का बड़ा दावा: SIR के चलते राज्य में 77 मौतें, केंद्र पर गंभीर आरोप

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कोलकाता, 10 जनवरी 2026 । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा दावा किया है। ममता बनर्जी का कहना है कि SIR के कारण राज्य में अब तक 77 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने इस मुद्दे को मानवीय संकट बताते हुए कहा कि किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी प्रक्रिया को लोगों की जान से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त को 2 पेज का लेटर लिखा। इसमें राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर आम नागरिकों को लगातार परेशान जाने का आरोप लगाया।

ममता ने लिखा- SIR प्रोसेस में मानवीय संवेदनशीलता नहीं दिखी। 77 लोगों की मौत, 4 आत्महत्या के प्रयास और 17 लोगों के बीमार होने की वजह SIR प्रक्रिया रही। लोगों में डर रहा, दबाव रहा। SIR बिना तैयारी कराया गया।

CM ने आरोप लगाया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन जैसे बुजुर्ग और सम्मानित लोगों से भी पहचान साबित करने को कहा गया। इसी तरह कवि जॉय गोस्वामी, अभिनेता-सांसद दीपक अधिकारी और क्रिकेटर मोहम्मद शमी को भी इस प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।

दरअसल पश्चिम बंगाल में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 58.20 लाख नाम कट गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 7.66 करोड़ थे, ड्राफ्ट लिस्ट में 7.08 करोड़ वोटर्स का नाम शामिल किया गया।

काटे गए वोटर्स का प्रतिशत 7.6 है, यानी हर 100 से में लगभग 8 वोटर्स का नाम हटाया गया है। हालांकि, 58.20 लाख वोटर्स में से 24.17 लाख मृत पाए गए, 1.38 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, 32.65 लाख वोटर्स शिफ्ट, लापता और अन्य थे।

ममता ने यह भी कहा कि उनकी सरकार लगातार केंद्र को इस मुद्दे पर आगाह करती रही है, लेकिन चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने मांग की कि SIR से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को राजनीतिक नहीं, बल्कि इंसानी संवेदनाओं से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि जवाबदेही तय होना जरूरी है।

इस बयान के बाद राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने ममता के आरोपों पर सवाल उठाए हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे केंद्र की नीतियों की विफलता बताया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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