नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025 । चीन ने एक बार फिर भारत-पाक संबंधों को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने दोनों देशों के बीच संभावित संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाई। इस बयान के बाद दक्षिण एशिया की कूटनीति, क्षेत्रीय संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। चीन का यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में घटनाक्रम पर वैश्विक नजर बनी रहती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बाद अब चीन ने भी यह दावा किया है कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को कम कराने में भूमिका निभाई थी। चीन का कहना है कि जब इस साल दोनों देशों के बीच हालात बिगड़ गए थे, तब उसने बीच में आकर तनाव कम करने की कोशिश की।
मंगलवार को बीजिंग में आयोजित एक कार्यक्रम में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने में मदद करता रहा है। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान भी चीन ने मध्यस्थता की थी।
मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि भारत सरकार ने चीन के इस दावे को खारिज किया है। भारत ने कहा है कि संघर्ष को रुकवाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं है।
चीन का यह बयान उस समय को लेकर है, जब इस साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ था। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कई आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे कुल मिलाकर 11 एयरबेस को नुकसान पहुंचा था।
भारत ने यह हमला 22 अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी।
भारत के रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान चीन की क्षेत्रीय भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की कोशिश हो सकते हैं। भारत की आधिकारिक नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है कि भारत-पाक मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया जाता। भारत का रुख यह भी रहा है कि शांति और तनाव का स्तर दोनों देशों के व्यवहार और नीतियों पर निर्भर करता है, न कि बाहरी हस्तक्षेप पर।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चीन का यह दावा अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को “शांति स्थापित करने वाले शक्ति केंद्र” के रूप में पेश करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। साथ ही, यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन खुद कई मोर्चों पर—चाहे वह सीमा विवाद हों या वैश्विक छवि—दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में दक्षिण एशिया में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के तौर पर भी इसे देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, चीन के इस दावे ने भारत-पाक संबंधों को लेकर चल रही कूटनीतिक बहस में नया मोड़ ला दिया है। हालांकि, भारत की स्थापित नीति और पूर्व अनुभवों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि किसी भी तरह के संघर्ष या शांति के फैसले भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर ही करता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान पर भारत और पाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं क्या रहती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे किस नजर से देखता है।