सुप्रीम कोर्ट ने कहा—करूर भगदड़ की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी: प्रशासनिक जवाबदेही, पीड़ितों के अधिकार और भीड़ प्रबंधन सुधारों पर कड़ी टिप्पणी

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नई दिल्ली, 12 दिसंबर 2025 । करूर भगदड़ घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि इस मामले की पूर्ण, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि भीड़ प्रबंधन में लापरवाही, प्रशासनिक विफलता और सुरक्षा इंतजामों की कमी जैसे गंभीर आरोपों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को करूर भगदड़ मामले में पहले दिए गए अपने निर्देश को बदलने से इनकार कर दिया। अदालत ने निर्देश दोहराते हुए कहा कि CBI जांच की निगरानी करने वाले सुपरवाइजरी कमेटी के सदस्य तामिलनाडु के मूल निवासी नहीं होंगे।

मामले की सुनवाई जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने की। विजय की पार्टी TVK की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा ने CBI जांच के आदेश पर आपत्ति जताई थी, लेकिन कोर्ट ने कोई बदलाव नहीं किया। सुनवाई के दौरान जस्टिस महेश्वरी ने कहा, “हम चाहते हैं कि सब कुछ निष्पक्ष हो।”

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर के अपने फैसले को याद किया और बताया कि यह कमेटी जांच को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए बनाई गई थी। कमेटी का नेतृत्व पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस अजय रस्तोगी करेंगे। उन्हें आदेश दिया गया कि वे दो वरिष्ठ IPS अधिकारी चुनें, जो तामिलनाडु कैडर से हो सकते हैं, लेकिन तमिलनाडु के मूल निवासी नहीं होंगे।

पीठ ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं केवल हादसे नहीं होतीं, बल्कि अक्सर उन व्यवस्था-संबंधी चूकों का परिणाम होती हैं जिन्हें टाला जा सकता था। अगर सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाता, भीड़ नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाते और स्थानीय प्रशासन समय रहते सतर्क होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की स्थिति पर अपडेट मांगा है। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि अगर स्थानीय जांच में पारदर्शिता नहीं दिखती, तो वह विशेष जांच टीम (SIT) या किसी स्वतंत्र एजेंसी की निगरानी में जांच का निर्देश दे सकती है।
पीड़ित परिवार इस घटना के बाद से लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, और अदालत की यह टिप्पणी उनके लिए एक महत्वपूर्ण उम्मीद बनकर आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस केस में कोर्ट की सक्रियता भविष्य में भीड़ प्रबंधन से जुड़ी नीति, आयोजन परमिशन और सुरक्षा मानकों को और सख्त कर सकती है।

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