न्यूयॉर्क, 29 नवम्बर 2025 । पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को हाल ही में मिले व्यापक अधिकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संस्थान पाकिस्तान में लोकतांत्रिक ढाँचे, सत्ता के संतुलन और नागरिक शासन पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जता रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की सेना को असामान्य रूप से अधिक शक्तियाँ मिली हैं, लेकिन इस बार स्थिति इसलिए अधिक गंभीर मानी जा रही है क्योंकि सैन्य नेतृत्व को मिली नई शक्तियाँ देश की राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक संरचना को सीधे प्रभावित कर रही हैं।
पाकिस्तान में हुए संविधान संशोधन को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। यूएन ह्यूमन राइट एजेंसी (UNHR) के हाई कमिश्नर वोल्कर टर्क ने चेतावनी दी है कि 27वां संविधान संशोधन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है।
टर्क ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि यह बदलाव उन जरूरी कानूनी नियमों (रूल ऑफ लॉ) को भी कमजोर कर सकता है, जिनसे देश में कानून-व्यवस्था बनी रहती है।
पाकिस्तान में 12 नवंबर को संसद ने सेना की शक्तियों को बढ़ाने और सुप्रीम कोर्ट की ताकत कम करने वाले 27वें संवैधानिक संशोधन को मंजूरी दी थी। इस दौरान संविधान के 48 अनुच्छेदों में बदलाव किए गए थे।
‘अदालत पर राजनीति का असर बढ़ेगा’
टर्क ने चिंता जताई कि संविधान संशोधन पिछले साल पारित 26वें संविधान संशोधन की तरह बिना जरूरी चर्चा के बिना ही पास कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि ये बदलाव सिस्टम में इतनी बड़ी फेरबदल करते हैं कि अदालतों पर राजनीति का असर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
टर्क ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता का एक मुख्य पैमाना यह है कि उस पर सरकार का दखल न हो। अगर यह सुरक्षा खत्म हो गई, तो अदालतें मानवाधिकारों की रक्षा नहीं कर पाएंगी और न ही कानून को सभी पर बराबरी से लागू कर पाएंगी।
संविधान संशोधन पर फिर से विचार करने की अपील
टर्क ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस संशोधन की समीक्षा करे और ऐसे बदलाव करे, जिनसे देश की संस्थाएं मजबूत हों, कमजोर नहीं। संयुक्त राष्ट्र की यह चिंता ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान की सेना में बड़े बदलाव हो रहे हैं।
सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने 27 नवंबर को देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के रूप में कार्यभार संभाला है। यह नया पद भी इसी संवैधानिक संशोधन के तहत बनाया गया है।
जनरल आसिम मुनीर को मिली असाधारण शक्तियाँ पाकिस्तान के लोकतांत्रिक तंत्र और क्षेत्रीय स्थिरता, दोनों के लिए गंभीर विषय बन गई हैं। संयुक्त राष्ट्र की चिंता इस बात का संकेत है कि यदि सत्ता के केंद्रीकरण की यह प्रक्रिया जारी रही, तो पाकिस्तान एक बड़े राजनीतिक संकट की ओर बढ़ सकता है।