भागवत बोले — “भारत के स्वभाव में झगड़ा नहीं, भाईचारा है” — एक विचार और उसका सामाजिक महत्व

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नई दिल्ली, 29  नवम्बर 2025 । हाल ही में कन्हैया कुमार भगवत (या यदि आप किसी और ‘भागवत’ व्यक्तित्व की बात कर रहे हैं, कृपया बताएं) द्वारा कथित रूप से कहा गया कथन — “भारत के स्वभाव में झगड़ा नहीं, भाईचारा है” — सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। इस बयान के जरिए एक संदेश देना चाहा गया है कि भारत की आत्मा संघर्ष या वैमनस्यता नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व, भाईचारे और सहिष्णुता की रही है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा, ‘झगड़ों में पड़ना भारत के स्वभाव में नहीं है, देश की परंपरा ने हमेशा भाईचारे और सामूहिक सद्भाव पर जोर दिया है।’

उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद का कॉन्सेप्ट पश्चिमी व्याख्याओं से पूरी तरह अलग है। हमारी किसी से कोई बहस नहीं होती। हम झगड़ों से दूर रहते हैं। दुनिया के दूसरे हिस्से संघर्ष से भरे हालात में बने हैं।

नागपुर में नेशनल बुक फेस्टिवल में भागवत ने कहा- एक बार जब कोई राय बन जाती है, तो उसके अलावा कुछ भी मंजूर नहीं होता। ऐसी राय दूसरी बातों के लिए दरवाजा बंद कर देती हैं। उन बातों को बहस कहा जाता है।

भागवत ने कहा कि पश्चिम देश नेशनहुड के बारे में हमारे विचार नहीं समझते, इसलिए उन्होंने इसे नेशनलिज्म कहना शुरू कर दिया। राष्ट्र का हमारा कॉन्सेप्ट वेस्टर्न देशों के नेशन के आइडिया से अलग है। हमारे बीच इस बारे में कोई मतभेद नहीं है कि यह नेशन है या नहीं, यह एक राष्ट्र है और यह पुराने समय से है।

पश्चिमी देश हमारे विचार नहीं समझते

RSS प्रमुख ने कहा कि पश्चिम देश नेशनहुड के बारे में हमारे विचार नहीं समझते, इसलिए उन्होंने इसे नेशनलिज्म कहना शुरू कर दिया। राष्ट्र का हमारा कॉन्सेप्ट वेस्टर्न देशों के नेशन के आइडिया से अलग है। हमारे बीच इस बारे में कोई मतभेद नहीं है कि यह नेशन है या नहीं, यह एक राष्ट्र है और यह पुराने समय से है।

उन्होंने कहा कि अगर हम वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में नेशन की डेफिनिशन पर विचार करें, तो इसमें आमतौर पर एक नेशन-स्टेट होता है, जिसमें एक सेंट्रल गवर्नमेंट होती है जो इलाके को मैनेज करती है। हालांकि, भारत हमेशा से एक राष्ट्र रहा है, यहां तक ​​कि अलग-अलग सरकारों और विदेशी शासन के समय में भी।

AI को रोका नहीं जा सकता

भागवत ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी टेक्नोलॉजी के आने को रोका नहीं जा सकता, लेकिन हमें इसके मालिक बने रहना चाहिए और इससे निपटते समय अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। AI का इस्तेमाल इंसानियत के फायदे के लिए, इंसानों को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

भाषा और संस्कृति पर ग्लोबलाइजेशन की चुनौती के बारे में एक सवाल पर उन्होंने कहा कि यह अभी एक भ्रम है। ग्लोबलाइजेशन का असली दौर अभी आना बाकी है और भारत इसे लाएगा। भारत में शुरू से ही ग्लोबलाइजेशन का कॉन्सेप्ट रहा है और इसे वसुधैव कुटुम्बकम (दुनिया एक परिवार है) कहा जाता है।

एक विचार जो हमें हमेशा याद रखना चाहिए

“भारत के स्वभाव में झगड़ा नहीं, भाईचारा है” — यह बयान तभी सार्थक है, जब हम उसे सिर्फ शब्दों में नहीं, कर्मों में भी निभाएँ।

  • हमें विविधता को स्वीकार करना चाहिए — भाषा हो, धर्म हो, संस्कृति हो या विचार।

  • मतभेदों को अवसर समझें, संघर्ष न होने दें; संवाद और सहिष्णुता से समाधान खोजें।

  • सामाजिक न्याय, समानता और समझ — इन पर जोर देते हुए, “भाईचारे” की भावना को व्यवहार में लाएँ।

ऐसे में यह विचार सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि भारत की असली आत्मा बनेगा।

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